शेयर मंथन में खोजें

ठहराव के बीच निफ्टी (Nifty) की कोशिश 8,300 बचाने की : इडेलवाइज

छह दिनों की लगातार बढ़त के बाद मंगलवार को बाजार थमा और निफ्टी (Nifty) 0.42% की गिरावट के साथ 8335 पर बंद हुआ था।

नकारात्मक वैश्विक संकेतों के चलते कमजोर खुलने के बाद पूरे दिन बाजार सुस्त रहा। इडेलवाइज सिक्योरिटीज (Edelweiss Securities) ने अपनी तकनीकी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि मंगलवार को निफ्टी ने 21 घंटों के ईएमए को नीचे की ओर थोड़ा काटा। दैनिक चार्ट पर एक मंद एनगल्फिंग कैंडल की संरचना बनी है, लेकिन इडेलवाइज का मानना है कि सोमवार का दायरा छोटा होने के कारण इस संरचना को बहुत प्रभावी नहीं माना जा सकता।
उतार-चढ़ाव दर्शाने वाला सूचकांक इंडिया विक्स (India VIX) घट कर 15.36% पर आ गया है, जो एक निश्चिंतता क्षेत्र कहा जा सकता है यानी बाजार सहभागी निकट भविष्य में कम जोखिम देख रहे हैं। मोमेंटम ऑसिलेटर मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। जहाँ घंटेवार चार्ट पर ये मंद संकेत दे रहे हैं, वहीं दैनिक चार्ट पर ये तेजी दिखा रहे हैं पर हद से ज्यादा खरीदारी (ओवरबॉट) के क्षेत्र के नजदीक पहुँच गये हैं।
इडेलवाइज का मानना है कि निफ्टी यहाँ जरा थम कर दम लेगा और एक ठहराव (कंसोलिडेशन) से गुजरेगा, हालाँकि यह 8,300 के ऊपर बने रहने की कोशिश करेगा। इसकी सलाह है कि किसी बढ़त पर अपने खरीदारी सौदों को हल्का किया जा सकता है, क्योंकि आगे बढ़त की संभावना 8,490 तक सीमित लगती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी जोखिम-लाभ अनुपात तेजड़ियों के पक्ष में नहीं दिख रहा है। बाजार के रुझान के लिए इडेलवाइज ने 21 दिनों के ईएमए (अभी 8,202) के सहारे को महत्वपूर्ण बताया है। (शेयर मंथन, 7 जुलाई 2016)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख