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क्या हल्की और अफोर्डेबल डायमंड ज्वेलरी बनेगी प्रायोरिटी ज्वेलरी की सबसे बड़ी ताकत?

प्रायोरिटी ज्वेलरी ने अपने बिजनेस मॉडल के लिए एक स्पष्ट रणनीति अपनाई है।

कंपनी रिटेल ज्वेलरी चेन के बजाय B2B सप्लाई पर केंद्रित है और ज्वेलर्स तथा ज्वेलरी चेन को डायमंड ज्वेलरी उपलब्ध कराती है। कंपनी के फाउंडर शैलेश संगानी के मुताबिक, उन्होंने शुरुआत से ही होलसेल और मैन्युफैक्चरिंग मॉडल पर ध्यान दिया, क्योंकि रिटेल बिजनेस में काफी अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है। कंपनी ने अपने अनुभव और डिजाइन-कौशल को आधार बनाकर B2B सेगमेंट में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की है।

कंपनी खुद को केवल ज्वेलरी ट्रेडर नहीं बल्कि मैन्युफैक्चरर के रूप में पेश करती है। मैनेजमेंट के अनुसार, डिजाइनिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट कंपनी के अंदर ही किया जाता है। कंपनी की खासियत लाइट-वेट डायमंड ज्वेलरी बनाना है। बढ़ती सोने की कीमतों के बीच कंपनी का उद्देश्य ऐसे डिजाइन तैयार करना है जिनमें कम सोने का इस्तेमाल हो, लेकिन ग्राहक को ज्वेलरी का लुक और डिजाइन आकर्षक मिले। उदाहरण के तौर पर मैनेजमेंट ने बताया कि जिस ज्वेलरी को पहले करीब 20 ग्राम में बेचा जाता था, उसे तकनीक और डिजाइन के जरिए 15 से 10 ग्राम तक लाने की कोशिश की जाती है।

कंपनी के बिजनेस में तकनीक के साथ कारीगरों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। मैनेजमेंट का कहना है कि ज्वेलरी निर्माण में अभी भी कुशल कारीगरों की जरूरत है और तकनीक को उनके साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा रहा है। कंपनी के पास करीब 250 कारीगर अपने पेरोल पर हैं, जबकि सीजन और काम की जरूरत के अनुसार लगभग 150 अतिरिक्त कारीगर भी लिए जाते हैं। इस तरह सीजन के दौरान करीब 400 कारीगर कंपनी के साथ काम कर सकते हैं। इससे पता चलता है कि कंपनी का उत्पादन मॉडल पूरी तरह ऑटोमेशन पर आधारित नहीं है, बल्कि तकनीक और पारंपरिक कारीगरी के संयोजन पर टिका है।

कंपनी के लिए आगे बढ़ने का एक प्रमुख रास्ता नए ग्राहकों को जोड़ना है। मैनेजमेंट के मुताबिक, देश में अभी भी कई चेन स्टोर्स ऐसे हैं जिन्हें कंपनी अपना ग्राहक बना सकती है। इसके अलावा छोटे स्वतंत्र ज्वेलर्स और क्षेत्रीय चेन स्टोर्स की संख्या बढ़ने से भी कंपनी को अवसर दिखाई देता है। कंपनी की रणनीति मौजूदा चेन स्टोर्स के साथ कारोबार बढ़ाने के साथ-साथ नए इंडिपेंडेंट स्टोर्स को जोड़ने की है। ऐसे में कंपनी की भविष्य की ग्रोथ काफी हद तक उसके ग्राहक आधार के विस्तार और B2B नेटवर्क को मजबूत करने पर निर्भर रह सकती है।


(शेयर मंथन, 28 अगस्त 2026)

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