सोने की कीमतों में इस समय लगातार उठापटक देखने को मिल रही है।
तेज उतार-चढ़ाव के बीच घरेलू बाजार में सोना करीब 1.5 लाख रुपये के आसपास पहुंच चुका है, लेकिन बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि इस स्तर पर जल्दबाजी में नई खरीदारी करने की जरूरत नहीं है। सोने की आगे की दिशा समझने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके प्रमुख स्तरों पर नजर रखना ज्यादा जरूरी होगा। उनका मानना है कि जब तक गोल्ड फ्यूचर्स 4,750 डॉलर के ऊपर मजबूती से क्लोज नहीं करता, तब तक सोने में किसी बड़े नए अपमूव की उम्मीद करना मुश्किल है।
विश्लेषक के मुताबिक, सोने में 4,000 से 4,700-4,800 डॉलर तक की जो तेजी देखने को मिली, वह एक बड़ा मूव था। अब अगले बड़े मूव के लिए निवेशकों को धैर्य रखना चाहिए। ऐसे निवेशक जो लंबी अवधि के नजरिए से सोने में निवेश करना चाहते हैं, वे चरणबद्ध तरीके से SIP मोड में खरीदारी कर सकते हैं। वहीं आक्रामक तरीके से नई पोजीशन बनाने के बजाय 4,750 डॉलर के ऊपर फ्यूचर्स की क्लोजिंग का इंतजार करना बेहतर रणनीति हो सकती है।
हालांकि सोने में आगे और करेक्शन की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। छोटे टाइम फ्रेम पर इसमें हेड एंड शोल्डर्स जैसा पैटर्न बनने की संभावना बताई जा रही है। अगर इस पैटर्न का ब्रेकडाउन 4,300 डॉलर के नीचे होता है, तो सोना अपने पिछले निचले स्तरों को दोबारा टेस्ट कर सकता है। ऐसी स्थिति में 3,900 डॉलर के आसपास तक गिरावट की संभावना बन सकती है। यानी मौजूदा स्तर से करीब 10 फीसदी तक की अतिरिक्त कमजोरी संभव है। हालांकि यह एक संभावित तकनीकी परिदृश्य है, निश्चित भविष्यवाणी नहीं।
सोने की चाल को समझने में डॉलर और घरेलू कीमतों के बीच संबंध भी महत्वपूर्ण है। घरेलू बाजार में निवेश करने वाले लोगों को केवल रुपये में सोने की कीमत देखने के बजाय अंतरराष्ट्रीय गोल्ड प्राइस और मुद्रा बाजार की चाल पर भी नजर रखनी चाहिए। खासकर ऐसे समय में जब सोना पहले ही काफी ऊंचे स्तरों पर कारोबार कर रहा हो, किसी भी नए निवेश से पहले सपोर्ट और रेजिस्टेंस को समझना जरूरी हो जाता है।
दूसरी तरफ घरेलू स्तर पर आने वाला त्योहारी सीजन सोने की मांग के लिए सकारात्मक ट्रिगर बन सकता है। गणपति से शुरू होने वाले त्योहारों और आगे आने वाले शुभ अवसरों में सोने की खरीदारी बढ़ने की उम्मीद रहती है। ऐसे में घरेलू मांग सोने की कीमतों को कुछ सपोर्ट दे सकती है। हालांकि शॉर्ट टर्म में यह मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल पर पूरी तरह हावी होगी या नहीं, यह कहना मुश्किल है।
(शेयर मंथन, 07 सितंबर 2026)
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