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क्या अल्ट्राटेक के 1,800 करोड़ रुपये के निवेश से वायर और केबल कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव?

बिड़ला समूह की अल्ट्राटेक सीमेंट की वायर और केबल कारोबार में 1,800 करोड़ रुपये के निवेश के साथ एंट्री ने पूरे सेक्टर में हलचल बढ़ा दी है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि बाजार में इस एंट्री की चर्चा पहले से थी, लेकिन घोषणा के बाद केबल कंपनियों के शेयरों पर तत्काल दबाव देखने को मिला। KEI Industries, Polycab, Finolex Cables और RR Kabel जैसे प्रमुख नामों में गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, इस खबर को पूरी तरह से अचानक आया घटनाक्रम नहीं माना जा सकता, क्योंकि बाजार को पहले से अंदाजा था कि बिड़ला समूह इस क्षेत्र में उतरने वाला है। इसके बावजूद आधिकारिक घोषणा के बाद शेयरों में तेज प्रतिक्रिया देखने को मिली।

इस स्थिति को समझने के लिए पेंट इंडस्ट्री का उदाहरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जब बिड़ला समूह पेंट कारोबार में आया था, तब शुरुआत में कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी, प्राइस वॉर शुरू हुआ और मार्जिन पर दबाव आया। लेकिन समय के साथ इंडस्ट्री ने इस दबाव को पचा लिया, मार्जिन का बॉटम आउट हुआ और वैल्यूएशन भी सामान्य स्तरों पर आने लगे। इसके बाद कंपनियों के शेयरों में सेक्टर की सामान्य डिमांड के आधार पर दोबारा सुधार देखने को मिला। वायर और केबल सेक्टर में भी कुछ इसी तरह की स्थिति बनने की संभावना जताई जा रही है।

वायर और केबल कंपनियों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा डिमांड का नहीं बल्कि प्राइसिंग पावर का हो सकता है। भारत में रियल एस्टेट, कमर्शियल और रेजिडेंशियल कंस्ट्रक्शन के साथ-साथ इंडस्ट्रियल सेक्टर में भी केबल और वायर की जरूरत लगातार बनी रहेगी। इसलिए सेक्टर की ग्रोथ को लेकर बहुत बड़ी चिंता नहीं है। असली चुनौती यह होगी कि नई कंपनी के आने के बाद प्रतिस्पर्धा कितनी बढ़ती है और इसका कंपनियों के मार्जिन पर कितना असर पड़ता है। अनुमान है कि प्राइस वॉर और मार्जिन प्रेशर का दौर एक-दो वित्तीय वर्षों तक चल सकता है।

इसका सीधा असर वैल्यूएशन पर भी पड़ सकता है। जिन कंपनियों को बाजार लंबे समय से 40-50 या 60 के मल्टीपल पर वैल्यू दे रहा था, उनके वैल्यूएशन सामान्य होकर 25-35 के दायरे में आ सकते हैं। इसका मतलब यह है कि कंपनियों की ग्रोथ बनी रहने के बावजूद शेयरों में वैल्यूएशन कंप्रेशन के कारण करेक्शन आ सकता है। बड़े और संगठित खिलाड़ी जैसे Polycab अपनी मजबूत स्थिति और प्राइसिंग पावर के कारण इस चुनौती का सामना अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से कर सकते हैं, लेकिन पूरे सेक्टर पर कुछ समय के लिए दबाव रह सकता है। इसलिए फिलहाल निवेशकों के लिए केवल शेयर की गिरावट को देखकर एंट्री करने के बजाय आने वाले एक-दो वित्तीय वर्षों में मार्जिन और प्राइसिंग पावर पर नजर रखना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।


(शेयर मंथन, 08 सितंबर 2026)

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