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क्या मिडकैप-स्मॉलकैप में अभी सिर्फ प्रॉफिट बुकिंग है या बड़ा खतरा?

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में हालिया कमजोरी को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि इसे फिलहाल बड़े डाउनट्रेंड की शुरुआत मानने के बजाय प्रॉफिट बुकिंग के तौर पर देखना बेहतर होगा। उनका कहना है कि मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी काफी लंबे समय से लगातार बनी हुई थी, इसलिए कुछ मुनाफावसूली होना स्वाभाविक है। इसके साथ ही ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी दबाव बढ़ाया है। हालांकि, घरेलू ग्रोथ के दम पर मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप कंपनियों की कमाई में संभावनाएं बनी हुई हैं। मौजूदा स्तरों पर इंडेक्स का वैल्यूएशन भी उन्हें बहुत ज्यादा महंगा नहीं लगता। अगर करीब 15% की अर्निंग ग्रोथ आती है, तो आगे भी लगभग 15% तक का अपसाइड देखने को मिल सकता है। इसलिए थोड़े समय की गिरावट को लेकर घबराने के बजाय धैर्य रखना जरूरी है।

मौजूदा बाजार में एक ही थीम या शेयर में लंबे समय तक पैसा छोड़कर बैठना सही रणनीति नहीं है। बाजार में कई साइकिल तेजी से बन रही हैं, इसलिए पोर्टफोलियो में रोटेशन और सीमित चर्निंग जरूरी है। जिन शेयरों में अच्छा रिटर्न मिल चुका है और वैल्यूएशन काफी खिंच गया है, वहां कुछ मुनाफा निकालकर उन कंपनियों की तरफ जाने की रणनीति अपनाई जा सकती है, जहां वैल्यूएशन अपेक्षाकृत बेहतर हैं और अगले 3-4 साल में कमाई बढ़ने की संभावना है। उनका फोकस फिलहाल कंजम्पशन, कैपेक्स और फार्मा जैसे ग्रोथ-oriented सेक्टरों पर बना हुआ है। यानी रणनीति का मुख्य आधार यह है कि महंगे हो चुके हिस्सों से पैसा निकालकर अपेक्षाकृत बेहतर वैल्यूएशन वाले हिस्सों में लगाया जाए।


(शेयर मंथन, 14 सितंबर 2026)

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