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सोना और चांदी दोनों दबाव में, लेकिन शॉर्ट कवरिंग से आ सकती है राहत

सोने के साथ-साथ चांदी में भी इस समय कमजोरी का रुख बना हुआ है।

कई निवेशक यह जानना चाहते हैं कि क्या चांदी अपने निचले स्तर के करीब पहुंच चुकी है, लेकिन बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि किसी भी एसेट का सटीक बॉटम पकड़ना लगभग असंभव होता है। मौजूदा ट्रेंड अभी भी नीचे की ओर है और ऐसे माहौल में केवल इस आधार पर खरीदारी करना कि कीमत काफी गिर चुकी है, सही रणनीति नहीं मानी जा सकती। हालांकि अधिक बिकवाली के कारण किसी भी समय शॉर्ट कवरिंग की वजह से तेज उछाल देखने को मिल सकता है, लेकिन इसे ट्रेंड बदलने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।

एक्सपर्ट के अनुसार, यदि चांदी की कीमतें 50 डॉलर के करीब पहुंचती हैं तो वहां निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत बेहतर सुरक्षा का स्तर बन सकता है। फिर भी यह संभावना बनी हुई है कि अंतिम सपोर्ट इससे भी नीचे मिले। इसलिए जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय ट्रेंड बदलने का इंतजार करना अधिक सुरक्षित रणनीति होगी। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यदि चांदी का औसत खरीद मूल्य 50 से 55 डॉलर के बीच रहता है, तो तीन से चार साल के नजरिए से अच्छे रिटर्न की संभावना बन सकती है। फिलहाल सोना और चांदी दोनों में निवेश का सबसे महत्वपूर्ण नियम यही है कि पहले ट्रेंड में सुधार के संकेत दिखाई दें, उसके बाद ही नया निवेश करने पर विचार किया जाए।


(शेयर मंथन, 06 जुलाई 2026)

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