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एप्पल में गिरावट से फिर गिरा अमेरिकी बाजार, डॉव जोंस 57.94 अंक नीचे

एप्पल में आयी कमजोरी का नकारात्मक असर शुक्रवार को अमेरिकी बाजार पर पड़ा और इसके प्रमुख सूचकांक हफ्ते के आखरी दिन भी कमजोरी के साथ बंद हुए।

एफआईआई की बिकवाली बढ़ा रही चिंता, चुनाव तक बड़े दायरे में कंसोलिडेट करेगा बाजार : सिद्धार्थ खेमका, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (Motilal Oswal Financial Services Ltd) में रीटेल रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक बुधवार (15 मई) को ऊपरी स्तरों पर प्रतिरोध मिलने के बाद निफ्टी ने अपनी सारी बढ़त गँवा दी। सूचकांक मामूली गिरावट के बाद 22201 के स्तर पर बंद हुआ।  

एफआईआई के भारतीय बाजार में वापस आने से जारी रहेगी तेजी : सिद्धार्थ खेमका, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (Motilal Oswal Financial Services Ltd) में रीटेल रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक भारतीय बाजार ने लगातार 5वें दिन अपनी तेजी की उड़ान जारी रखने के साथ ही निफ्टी 50 23,350 (0.7%) के स्तर पर बंद हुआ।

एफआईआई की बिकवाली से बाजार चिंतित, चुनाव और खुदरा महँगाई दर के आँकड़े तय करेंगे चाल : सिद्धार्थ खेमका, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (Motilal Oswal Financial Services Ltd) में रीटेल रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक सोमवार (13 मई) को निफ्टी में अनुमानित शॉर्ट कवरिंग और निचले स्तर पर खरीदारी आने से एकदिनी निम्न स्तर से रिकवरी के बाद 49 अंकों की उछाल (0.20%) के साथ बंद हुआ।  

एफआईआईः शुद्ध निवेश एक लाख करोड़ रुपये के पार

साल 2013 में भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का शुद्ध निवेश पिछले कारोबारी हफ्ते में एक लाख करोड़ रुपये के आँकड़े को पार कर गया।

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  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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