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युद्ध तनाव के बीच सोना-चाँदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव, आगे क्या होने की उम्मीद है?

वैश्विक बाजार में सोने-चाँदी की कीमतों में हाल के दिनों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 5200 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा है, जबकि चांदी लगभग 89 डॉलर के स्तर पर बनी हुई है।

अनुज गुप्ता कहते है कि घरेलू कमोडिटी बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) में भी सोने का भाव लगभग 63,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास और चाँदी करीब 76,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर देखा जा रहा है। दोनों की कीमतों में अच्छी बढ़त दर्ज हुई है, जिसका प्रमुख कारण मध्य-पूर्व में युद्ध के ठंडा पड़ने की उम्मीद और सुरक्षित निवेश के तौर पर बढ़ती मांग है। सोने-चाँदी की मांग पर जियोपॉलिटिकल परिस्थितियों का बड़ा असर पड़ता है। युद्ध के दौरान मध्य-पूर्व जैसे बड़े बाजारों, खासतौर पर दुबई और सऊदी अरबॉ में ज्वेलरी की खरीदारी प्रभावित हुई, क्योंकि लोग बाजार जाने से बच रहे थे और नकदी रखना ज्यादा सुरक्षित मान रहे थे। इसी वजह से उस समय ज्वेलर्स को डिस्काउंट भी देना पड़ा और कीमतों में अपेक्षित तेजी नहीं दिखी। हालांकि अगर युद्ध की स्थिति सामान्य होती है और पर्यटन तथा व्यापार दोबारा पटरी पर लौटते हैं, तो सोने-चांदी की मांग में फिर तेजी आ सकती है।

आगे आने वाले महीनों में त्योहारों का मौसम भी कीमती धातुओं की मांग को बढ़ा सकता है। मध्य-पूर्व में ईद और भारत में नवरात्रि और त्योहारी सीजन के दौरान सोने-चाँदी की खरीदारी परंपरागत रूप से बढ़ जाती है। ऐसे में अगर जियोपॉलिटिकल तनाव कम होता है, तो बाजार में दोबारा मजबूत मांग देखने को मिल सकती है और कीमतों में धीरे-धीरे तेजी लौट सकती है।

हालांकि हाल में बने रिकॉर्ड स्तर को तुरंत पार करना आसान नहीं होगा, क्योंकि वे स्तर काफी हद तक ‘फोमो’ यानी तेजी की मनोवैज्ञानिक लहर के कारण बने थे। फिर भी लंबी अवधि में कीमती धातुओं का ट्रेंड सकारात्मक बना रह सकता है और दिवाली तक कीमतों में दोबारा अच्छी रैली देखने को मिल सकती है। फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है, लेकिन वैश्विक हालात सामान्य होने पर सोना-चाँदी फिर मजबूती की राह पकड़ सकते हैं।


(शेयर मंथन, 13 मार्च 2026)

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