सालल 2028 तक निफ्टी के 35,000 से 40,000 के दायरे में पहुँचने की संभावना को सिर्फ एक अनुमान नहीं, बल्कि एक स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी के रूप में देखा जा रहा है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि सबसे पहला और अहम आधार है कॉर्पोरेट अर्निंग्स ग्रोथ। मौजूदा समय में निफ्टी कंपनियों की अर्निंग ग्रोथ भले ही 2–4% के आसपास रही हो, लेकिन 2026–2028 के दौरान इसके 15-18% तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। अगर निफ्टी की EPS इस रफ्तार से बढ़ती है, तो तीन साल में कमाई का आधार काफी मजबूत हो जाएगा, जो इंडेक्स को नए उच्च स्तरों तक ले जा सकता है। दूसरा बड़ा फैक्टर है लिक्विडिटी और मैक्रो सपोर्ट। सॉफ्ट इन्फ्लेशन, ब्याज दरों में कटौती की संभावनाएँ, स्थिर या नरम क्रूड ऑयल और सरकार की ओर से कंजम्पशन को सपोर्ट करने वाली नीतियाँ- ये सभी बाजार के लिए अनुकूल माहौल बनाते हैं। जब लिक्विडिटी बढ़ती है और रेट साइकिल नीचे की ओर जाती है, तो इक्विटी वैल्यूएशन को सपोर्ट मिलता है।
तीसरा कारण है क्रेडिट ग्रोथ और BFSI सेक्टर का योगदान। बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर निफ्टी का सबसे बड़ा हिस्सा है। 12-15% की सस्टेनेबल क्रेडिट ग्रोथ, बेहतर एसेट क्वालिटी और स्थिर मार्जिन्स निफ्टी को मजबूती देते हैं। बैंक निफ्टी के 85,000 से ऊपर तक जाने की संभावना इसी लॉजिक से जुड़ी हुई है। चौथा फैक्टर है सेक्टरल रोटेशन। 2026 की दूसरी छमाही से मिडकैप और स्मॉलकैप में तेज हलचल की उम्मीद है, लेकिन उससे पहले और उसके साथ-साथ लार्जकैप, खासकर इंडेक्स हैवीवेट्स, निफ्टी को ऊपर खींचेंगे। IT, कंजम्पशन, ट्रैवल, रिटेल और चुनिंदा कैपेक्स स्टॉक्स इस मूवमेंट में योगदान दे सकते हैं।
(शेयर मंथन, 03 जनवरी 2026)
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