एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (HDFC AMC) को लंबे समय के निवेश के नजरिये से देखा जाए तो यह एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प मानी जा सकती है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि प्राइवेट सेक्टर की बड़ी एएमसी में किसी तरह की बुनियादी कमजोरी नजर नहीं आती। भारत में म्यूचुअल फंड की पेनिट्रेशन अभी भी बढ़ने की काफी गुंजाइश है, ऐसे में इस सेक्टर में लंबे समय तक ग्रोथ की संभावनाएं बनी हुई हैं। इसी वजह से एचडीएफसी एएमसीजैसे क्वालिटी स्टॉक्स को पोर्टफोलियो में जगह देना समझदारी भरा कदम हो सकता है। हालाँकि, इस स्टॉक में निवेश का तरीका बहुत अहम है। इसे ट्रेड की तरह टाइम करने की कोशिश करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि कई बार इसमें अपसाइड मूवमेंट अचानक शुरू होता है और लंबे समय तक चलता रहता है। ऐसे में बेहतर रणनीति यही मानी जाती है कि इसे पोर्टफोलियो स्टॉक की तरह देखा जाए और या तो नियमित SIP के जरिए निवेश किया जाए या फिर हर 5-10% की गिरावट पर धीरे-धीरे जोड़ते चला जाए। एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश ज्यादा प्रभावी रहता है।
कैसे करें निवेश?
उदाहरण के तौर पर, अगर कोई निवेशक इसमें कुल 1 लाख रुपये का निवेश करना चाहता है, तो उसे एक ही बार में पूरा पैसा लगाने के बजाय 8-10 महीनों में किस्तों में निवेश करना बेहतर होगा। मान लीजिए शेयर 3000 से गिरकर 2700 या 2500 तक आता है, तो ऐसी गिरावट को अवसर के तौर पर देखा जाना चाहिए। 15-20% तक का करेक्शन इस तरह के क्वालिटी स्टॉक में असामान्य नहीं है और लंबे समय में यही स्तर बेहतर रिटर्न की नींव बनाते हैं।
वैल्यूएशन के नजरिये से देखा जाए तो फिलहाल HDFC AMC करीब 38 गुना प्राइस-अर्निंग मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है, जो ऐतिहासिक औसत के मुकाबले ऊंचा जरूर है। सामान्य हालात में इसका फेयर वैल्यूएशन 20–22 गुना के आसपास माना जा सकता है, लेकिन सेक्टर में मजबूत ग्रोथ की वजह से बाजार इसे 30 गुना या उससे ऊपर का मल्टीपल देने को तैयार रहता है। इसी कारण इसमें बहुत ज्यादा डाउनसाइड की संभावना भी सीमित लगती है। मौजूदा स्तरों से लगभग 20% की गिरावट को ही एक एक्सट्रीम डाउनसाइड माना जा सकता है।
HDFC AMC लंबे समय के निवेश के लिए एक अच्छा स्टॉक है, लेकिन इसमें “एक बार पैसा लगाकर भूल जाने” वाली रणनीति से बेहतर है कि नियमित निवेश या गिरावट पर खरीद की जाए। SIP के जरिए या हर करेक्शन पर चरणबद्ध तरीके से निवेश करने से रिस्क भी कम रहता है और लंबे समय में बेहतर रिटर्न की संभावना बनती है।
(शेयर मंथन, 18 जनवरी 2026)
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