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मेटल सेक्टर महँगा? क्या वेदांता शेयरों में मिलेंगे सही वैल्यूएशन वाले मौके

राजीव बंसल जानना चाहते हैं कि उन्हें वेदांता (Vedanta) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि अभी पूरा बाजार सेक्टर-बेस्ड रैली की बजाय स्टॉक-स्पेसिफिक मूवमेंट दिखा रहा है। ऐसे माहौल में किसी एक पूरे सेक्टर को सस्ता या महंगा कह देना मुश्किल हो जाता है। फिलहाल क्रेडिट और कंजम्पशन से जुड़े सेक्टर्स में वैल्यूएशन तुलनात्मक रूप से ज्यादा रीजनेबल नजर आते हैं। बीएफएसआई (बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस) के साथ-साथ कंजम्पशन थीम में रिटेल, एफएमसीजी और हेल्थकेयर जैसे सेगमेंट में चुनिंदा स्टॉक्स में वैल्यूएशन और ग्रोथ का बेहतर बैलेंस दिख सकता है, जबकि कई दूसरे सेक्टर्स में ओवरऑल लेवल पर आकर्षक वैल्यूएशन मिलना फिलहाल मुश्किल है।

मेटल सेक्टर को लेकर निवेशकों में इस समय काफी ज्यादा उत्साह और फोमो (FOMO) दिख रहा है। वेदांता जैसे शेयरों में डिविडेंड और स्टेक सेल की खबरों ने शॉर्ट टर्म में तेजी का माहौल बनाया है, लेकिन इसी वजह से रिस्क भी बढ़ गया है। जब किसी शेयर में तेजी ज्यादा हेडलाइंस और चर्चाओं के दम पर होती है, तो वहां गिरावट का खतरा भी उतना ही बढ़ जाता है। ट्रेडिंग के नजरिए से मोमेंटम तब तक बना रह सकता है जब तक अहम सपोर्ट लेवल नहीं टूटते, लेकिन निवेश के नजरिए से मेटल सेक्टर इस समय हाई-रिस्क जोन में माना जा सकता है। सिर्फ इस वजह से खरीदारी करना कि “सब खरीद रहे हैं” या “खबरें अच्छी चल रही हैं”, आगे चलकर फंसने की वजह बन सकता है।

प्रेसियस मेटल्स और कमोडिटी थीम को लेकर भी इन दिनों नई-नई कहानियां बनाई जा रही हैं – कभी सिल्वर को “नया गोल्ड” कहा जा रहा है, कभी कॉपर को “नया सिल्वर” या “नया गोल्ड” बताया जा रहा है। ऐसी कहानियां अक्सर साइकिल के लेट स्टेज में ज्यादा सुनाई देती हैं। गोल्ड और सिल्वर के दामों में जो असामान्य तेजी देखने को मिल रही है, वह सामान्य वैल्यूएशन फ्रेमवर्क से समझ पाना मुश्किल हो गया है। ग्लोबल फैक्टर्स और बड़े देशों की खरीदारी से कीमतें सपोर्ट में हैं, इसलिए फिलहाल गिरावट के साफ संकेत नहीं दिखते, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि रिस्क खत्म हो गया है। हर एसेट क्लास का एक साइकिल होता है , पहले तेजी आती है, फिर फोमो बनता है और अंत में कई निवेशक ऊंचे स्तरों पर फंस जाते हैं।

मौजूदा बाजार में निवेशकों के लिए बेहतर रणनीति यह है कि सेक्टर की बजाय स्टॉक चुनें और वैल्यूएशन, अर्निंग्स ग्रोथ और बैलेंस शीट की मजबूती पर ज्यादा ध्यान दें। जहां ग्रोथ और वैल्यूएशन का संतुलन दिखे, वहीं धीरे-धीरे पोजिशन बनाना ज्यादा सुरक्षित रहेगा। मेटल और कमोडिटी जैसे हाई-फोमो वाले एरिया में फिलहाल सीमित एक्सपोजर और सख्त रिस्क मैनेजमेंट के साथ ही कदम बढ़ाना समझदारी मानी जा सकती है।


(शेयर मंथन, 31 जनवरी 2026)

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