अनिल मंगनानी
निदेशक, मॉडर्न शेयर्स
मेरा मानना है कि अगले 6 महीनों में भारतीय शेयर बाजारों की दिशा तय करने में अमेरिका-ईरान युद्ध और भूराजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें एवं वैश्विक अर्थव्यवस्था, अमेरिकी टैरिफ, भारत की जीडीपी वृद्धि दर, कंपनियों के तिमाही नतीजे तथा महँगाई और ब्याज दरों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
मैं दिसंबर 2026 तक सेंसेक्स को 70,000 और निफ्टी को 21,600 के स्तर पर देखता हूँ। हालाँकि जून 2027 तक मेरा लक्ष्य सेंसेक्स के लिए 62,000 और निफ्टी के लिए 19,000 है। अमेरिका-ईरान युद्ध का भारत और भारतीय शेयर बाजारों पर बड़ा नकारात्मक असर पड़ा है। मुझे नहीं लगता कि यह संघर्ष अभी समाप्त हुआ है और न ही मेरी राय में अमेरिका एवं ईरान के बीच कोई अंतिम समझौता होगा।
दूसरी ओर, मुझे उम्मीद है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता होगा और इसके दिसंबर 2026 तक अंतिम रूप लेने की संभावना है। यदि यह समझौता अगले 3-6 महीनों के भीतर हो जाता है, तो इसका भारतीय शेयर बाजारों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
अगले 6 महीनों में भारतीय बाजारों पर सबसे अधिक असर वैश्विक बाजारों में एआई थीम पर बनी तेजी के कमजोर पड़ने और उससे होने वाली गिरावट (करेक्शन) का रहेगा। मुद्रा बाजार में अगले 6 महीनों में डॉलर-रुपया विनिमय दर 91-95 रुपये के दायरे में बनी रह सकती है।
आगे के लिए मेरा मानना है कि सेंसेक्स 1 लाख के स्तर पर पहुँचने में वर्ष 2030 तक का समय लग सकता है। कुल मिला कर मुझे निकट अवधि में बाजार में किसी स्पष्ट रुझान की उम्मीद नहीं है। बाजार एक दायरे में रह कर आगे बढ़ेगा और निवेशकों को व्यापक बाजार की बजाय चुनिंदा शेयरों में बनने वाले अवसरों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
(शेयर मंथन, 12 जुलाई 2026)