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भारतीय बाजार अगले 12 महीनों में वैश्विक बाजारों से बेहतर प्रदर्शन करेंगे

सुमित बागड़िया

कार्यकारी निदेशक, चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग

भारतीय शेयर बाजार की दीर्घकालिक विकास यात्रा मजबूत बनी हुई है। स्वस्थ आर्थिक बुनियाद, कॉर्पोरेट आय में मजबूती और घरेलू निवेशकों की लगातार अच्छी भागीदारी बाजार को सहारा देती रहेगी।

भारतीय शेयर बाजार की दीर्घकालिक विकास यात्रा मजबूत बनी हुई है। स्वस्थ आर्थिक बुनियाद, कॉर्पोरेट आय में मजबूती और घरेलू निवेशकों की लगातार अच्छी भागीदारी बाजार को सहारा देती रहेगी। निकट अवधि में भूराजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव जैसे वैश्विक कारकों के चलते बाजार में अस्थिरता रह सकती है, लेकिन भारत की संरचनात्मक विकास गाथा सुरक्षित है।

मैं दिसंबर 2026 तक सेंसेक्स को 88,000 और निफ्टी को 28,000 के स्तर पर देखता हूँ। जून 2027 तक मेरा लक्ष्य सेंसेक्स के लिए 1,00,000 और निफ्टी के लिए 30,000 है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए निफ्टी की प्रति शेयर आय (ईपीएस) 1,380 रुपये और 2027-28 के लिए 1,450 रुपये रहने का अनुमान है। मुझे वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कॉर्पोरेट आय (अर्निंग्स) में 10-20% वृद्धि की उम्मीद है। भारत की जीडीपी वृद्धि दर 2026-27 में 6.5% और 2027-28 में 7.2% रहेगी।

इस समय भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे बड़े सकारात्मक कारक मजबूत घरेलू आर्थिक वृद्धि, स्वस्थ कॉर्पोरेट आय और निजी क्षेत्र के पूँजीगत व्यय चक्र में सुधार हैं। वहीं, भूराजनीतिक अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव तथा वैश्विक मुद्रा बाजार (Currency Markets) और बॉन्ड यील्ड में होने वाले बदलाव प्रमुख नकारात्मक कारक बने रहेंगे।

तेजी के अगले दौर का नेतृत्व बैंकिंग, पूँजीगत वस्तुएँ (Capital Goods), बुनियादी ढाँचा (Infrastructure), धातु (Metal), रक्षा (Defence), बिजली (Power) और विनिर्माण (manufacturing) क्षेत्रों के पास रहेगा। अगले 12 महीनों में भारतीय शेयर बाजार वैश्विक बाजारों से बेहतर प्रदर्शन करेंगे। मीडिया और तेल-गैस क्षेत्र अपेक्षाकृत कमजोर रह सकते हैं। अगले 12 महीनों के लिए मेरी पसंद के शीर्ष 5 शेयर महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (M&M), आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई, श्रीराम फाइनेंस और हिंडाल्को हैं।

अगले 6 महीनों में भारतीय बाजारों की दिशा तय करने में अमेरिका-ईरान युद्ध एवं भूराजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक अर्थव्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण रहेंगे। अमेरिका-ईरान युद्ध का भारत और भारतीय शेयर बाजार पर हल्का नकारात्मक असर पड़ा है। फिलहाल यह कहना कठिन है कि यह संघर्ष पूरी तरह समाप्त हो गया है, और अमेरिका-ईरान के बीच अंतिम समझौता हो पायेगा या नहीं।

आशा है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता (India US Trade Deal) अगले 3 महीनों में हो जायेगा। यदि यह समझौता अगले 3-6 महीनों के भीतर हो जाता है, तो इसका भारतीय शेयर बाजार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। मेरा मानना है कि वैश्विक और घरेलू ब्याज दरों का रुख भी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक रहेगा।

वैश्विक एआई बुलबुला अभी फूटा नहीं है, बल्कि वह अब अधिक तर्कसंगत भावों के दौर में प्रवेश कर रहा है। अगले 6 महीनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और वैश्विक तरलता (लिक्विडिटी), कच्चे तेल की कीमतें एवं भूराजनीतिक तनाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफपीआई) का निवेश, वैश्विक महँगाई और बॉन्ड यील्ड तथा डॉलर-रुपया विनिमय दर भारतीय बाजारों को सबसे अधिक प्रभावित करेंगे। एफपीआई के संबंध में मुझे उम्मीद है कि वे अगले 6-8 महीनों में भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध खरीदार बन जायेंगे।

डॉलर-रुपया विनिमय दर अगले 6 महीनों में 91-95 रुपये के दायरे में रह सकती है। जैसा मैंने ऊपर अनुमान जताया है, सेंसेक्स 2027 में ही 1 लाख के स्तर पर पहुँच जायेगा। निवेशकों को बाजार में आने वाली किसी गिरावट (करेक्शन) को अवसर के रूप में देखना चाहिए और दीर्घकालिक नजरिये के साथ मजबूत गुणवत्ता वाली कंपनियों में निवेश पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

(शेयर मंथन, 12 जुलाई 2026)

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