शेयर मंथन में खोजें

मुनाफे में गिरावट के बावजूद एसबीआई लाइफ (SBI Life) ने छुआ 52 हफ्तों का शिखर

मुनाफे में गिरावट के बावजूद एसबीआई लाइफ (SBI Life) के शेयर ने अपने पिछले 52 हफ्तों का शिखर छू लिया है।

एसबीआई लाइफ को पिछले कारोबारी साल की दूसरी तिमाही में 250.53 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। इसके मुकाबले चालू वित्त वर्ष की समान अवधि में कंपनी का मुनाफा 48.2% की गिरावट के साथ 129.84 करोड़ रुपये रहा।
एसबीआई लाइफ की प्रीमियम आमदनी 14.7% की बढ़त के साथ 2,548.04 करोड़ रुपये और प्रंबधन अधीन संपदा 23% की बढ़ोतरी के साथ 1,54,760 करोड़ रुपये हो गयी। वहीं पहली छमाही में एसीबआई लाइफ का नया व्यपार प्रीमियम 40% बढ़ कर 7,820 करोड़ रुपये, नवीकरण प्रीमियम 33% अधिक 9,120 करोड़ रुपये, व्यक्तिगत नया व्यापार प्रीमियम 30% अधिक 4,850 करोड़ रुपये और व्यक्तिगत रेटेड प्रीमियम 22% बढ़ कर 4,180 करोड़ रुपये रही।
गौरतलब है कि प्रमुख ब्रोकिंग फर्म आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुसार तिमाही में एसबीआई लाइफ के प्रीमियम आमदनी बेहतर रही।
दूसरी तरफ बीएसई में एसबीआई लाइफ का शेयर 839.65 रुपये के पिछले बंद स्तर की तुलना में आज लाल निशान में 836.20 रुपये पर खुला और 879.00 रुपये के 52 हफ्तों के शिखर तक चढ़ा। करीब साढ़े 11 बजे एसबीआई लाइफ के शेयरों में 32.95 रुपये या 3.92% की वृद्धि के साथ 872.60 रुपये पर कारोबार हो रहा है। इस भाव पर कंपनी की बाजार पूँजी 87,175.00 करोड़ रुपये है। पिछले 52 हफ्तों की अवधि में कंपनी के शेयर का निचला स्तर 495.00 रुपये रहा है। (शेयर मंथन, 16 अक्टूबर 2019)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख