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आरबीआई के पीसीए फ्रेमवर्क से बाहर निकला सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से बड़ी राहत मिली है। भारतीय रिजर्व बैंक ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को पीसीए यानी प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PCA) से बाहर करने का ऐलान किया है।

 इसका मतलब बैंक पर से पीसीए के तहत लगे प्रतिबंध खत्म हो जाएंगे। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया एकमात्र ऐसा बैंक था जो अभी तक पीसीए के तहत था। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के प्रदर्शन की समीक्षा बोर्ड फॉर फाइनेंशियल सुपरविजन ने की है। 31 मार्च 2022 तक के आंकड़ों के आकलन के बाद ऐसा पाया गया कि बैंक ने पीसीए के मानकों का उल्लंघन नहीं किया है। भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक बैंक ने लिखित में भी भरोसा दिया है कि आगे भी वह नियमों का पालन करता रहेगा। साथ ही न्यूनतम नियामक पूंजी, नेट एनपीए (NPA) और लेवरेज रेश्यो (अनुपात) का भी पालन करता रहेगा। साथ ही बैंक ने आरबीआई को स्ट्रक्चरल और सिस्टेमिक सुधार के जरिए किए गए वादों को पूरा करने का भरोसा दिया है। आरबीआई के मुताबिक पीसीए से बाहर आने के बाद भी बैंक पर कुछ शर्तें लागू होने के साथ लगातार निगरानी भी बनी रहेगी। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में मुनाफा 14.2 फीसदी बढ़कर 234.78 करोड़ रुपये रहा था। वहीं बैंक के गैर-निष्पादित संपत्तियां यानी ग्रॉस एनपीए 15.92 फीसदी से घटकर 14.9 फीसदी के स्तर पर आ गया है। बैंक का नेट एनपीए 5.09 फीसदी से घटकर 3.93 फीसदी पर आ गया है। आपको बता दें कि तीन सरकारी बैंक आरबीआई के पीसीए फ्रेमवर्क के तहत थे जिसमें से इंडियन ओवरसीज बैंक और यूको बैंक सितंबर 2021 में ही बाहर आ गए थे। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया जून 2017 में पीसीए के तहत आया था जिसकी वजह नेट एनपीए में बढ़ोतरी के साथ रिटर्न ऑन एसेट यानी निवेश पर मुनाफा काफी कम था। आपको बता दें कि आरबीआई किसी भी बैंक को पीसीए के तहत तभी डालता है जब कुछ नियामकीय जरुरतें जैसे रिटर्न ऑन एसेट, न्यूनतम पूंजी, एनपीए जिसमें लेंडिंग, प्रबंधन मुआवजा और निदेशकों की फी के मामले का उल्लंघन होता है। पीसीए के तहत जाने पर आरबीआई बैकों पर डिविडेंड भुगतान, शाखा विस्तार और प्रोमोटर्स को पूंजी डालने पर प्रतिबंध लगा देता है।

(शेयर मंथन, 20 सितंबर 2022 )

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