शेयर मंथन में खोजें

7000 चार्जिंग प्वाइंट्स लगाने के लिए टाटा मोटर्स की सब्सिडियरी का बीपीसीएल के साथ करार

टाटा मोटर्स की सब्सिडियरी ने ऑयल मार्केटिंग कंपनी बीपीसीएल (BPCL) के साथ (MoU) समझौते पत्र पर हस्ताक्षर किया है।

 कंपनी ने यह समझौता बिजली से चलने वाली गाड़ियों यानी EV की चार्जिंग के लिए 7000 चार्जिंग प्वाइंट्स लगाने के लिए किया है। यह करार टाटा मोटर्स की सब्सिडियरी टाटा पैसेंजर्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी यानी टीपीईएम (TPEM) ने किया है। इस करार के तहत 2024 तक 7000 ईवी चार्जिंग प्वाइंट्स लगाया जाना है। 

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक शैलेश चंद्रा ने कहा कि टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ने देश में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए ईवी को अपनाने के महत्व को बढ़ावा दिया है। चंद्रा के मुताबिक बड़े क्षेत्र में और भरोसेमंद चार्जिंग इंफ्रा होने से ईवी को अपनाने वालों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिली है। चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए जगह तय करने में दोनों कंपनियों के सुझाव शामिल किए जाएंगे।

आपको बता दें कि बीपीसीएल के देशभर में 21,000 रिटेल फ्यूल स्टेशन का नेटवर्क है। इसमें से 7000 फ्यूल स्टेशन पर ईवी की सुविधा विकसित की जाएगी। चार्जिंग प्वाइंट्स लगाने के दौरान टाटा मोटर्स के ईवी इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखा जाएगा। आपको बता दें कि टीपीईएम यानी टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की भारत में इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल के क्षेत्र में 71 फीसदी हिस्सेदारी है। रिटेल बीपीसीएल के कार्यकारी निदेशक संतोष कुमार ने कहा कि कंपनी लगातार अपने 7000 पारंपरिक रिटेल आउटलेट्स को एनर्जी स्टेशंस के तौर पर बदलने की दिशा में काम कर रही है। 

(शेयर मंथन, 12 दिसंबर 2023)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख