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कंपनियों की सुर्खियाँ

बायोकॉन बायोलॉजिक्स को ईएमए से Bevacizumab की मैन्युफैक्चरिंग के लिए मंजूरी मिली

बायोकॉन के लिए अच्छी खबर है। कंपनी की सब्सिडियरी बायोकॉन बायोलॉजिक्स को ईएमए यानी यूरोपियन मेडिसिन्स एजेंसी (EMA) से बायोसिमिलर दवा Bevacizumab की मैन्युफैक्चरिंग के लिए मंजूरी मिली है। इस दवा की मंजूरी से यूरोप में मरीजों की इस दवा की मांग को पूरी की जा सकेगी।

वित्त वर्ष 2025 के लिए गाइडेंस में कटौती से उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक का शेयर टूटा

उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक के शेयर में भारी गिरावट देखने को मिली। इसकी वजह बैंक की ओर से वित्त वर्ष 2025 के लिए लोन में वृद्धि को लेकर जारी गाइडेंस में कटौती की है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 के लिए ग्रॉस लोन ग्रोथ गाइडेंस 25% से घटाकर 20% किया है।

सिप्ला के गोवा इकाई को यूएसएफडीए से 6 आपत्तियां जारी

दवा की नामी कंपनी सिप्ला के लिए बुरी खबर है। अमेरिकी ड्रग रेगुलेटर यूएसएफडीए (USFDA) ने कंपनी की गोवा इकाई को जांच के बाद आपत्ति जारी की है। कंपनी की गोवा इकाई को 6 आपत्तियां जारी की गई है।

जीई पावर को एनटीपीसी जीई पावर सर्विसेज से ऑर्डर मिला

GE Power यानी जीई पावर कंपनी को एनटीपीसी जीई पावर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (NTPC GE Power Services Private Ltd) से बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी को 243.36 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट के लिए लेटर ऑफ इंटेंट यानी (LoI) मिला है। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत एलएमजेड (LMZ) स्ट्रीम टर्बाइन के रिनोवेशन और आधुनिकीकरण का काम शामिल है।

प्रेस्टिज एस्टेट्स के बोर्ड से QIP के जरिए फंड जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी

प्रेस्टिज एस्टेट्स के बोर्ड ने फंड जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बोर्ड ने क्यूआईपी (QIP) यानी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट के जरिए फंड जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

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निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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