शेयर मंथन में खोजें

एशियाई बाजारों में गिरावट से बाजार में हल्की कमजोरी

कारोबारी सप्ताह के पहले दिन सोमवार को एशियाई बाजारों में गिरावट के कारण भारतीय बाजार में भी शुरुआती सत्र में हल्की कमजोरी है।

इस समय एफएमसीजी, हेल्थकेयर, इंडस्ट्रियल और उपभोक्ता वस्तु क्षेत्रों में कुछ खरीदारी है, जबकि मूल सामग्री, दूरसंचार, धातु तथा तेल और गैस मे कमजोरी है। आज निफ्टी 10,452.50 के पिछले बंद भाव के मुकाबले 10,431.75 के स्तर पर खुला है। करीब पौने 10 बजे यह 18.45 अंक या 0.18% की गिरावट के साथ 10,434.05 अंक पर चल रहा है। वहीं सेंसेक्स 33,685.56 के पिछले बंद भाव के मुकाबले 33,710.15 पर खुलने के बाद 48.36 अंक या 0.14% की कमजोरी के साथ 33,637.20 अंकों के स्तर पर चल रहा है। इस समय बाजार के छोटे-मंझोले सूचकांकों में बढ़त दिख रही है। बीएसई मिडकैप में 0.06% और बीएसई स्मॉलकैल में 0.13% की मजबूती है। साथ ही निफ्टी मिड 100 में 0.03% की मामूली बढ़त और निफ्टी स्मॉल में 0.04% की हल्की कमजोरी है।
इस समय सेंसेक्स के 31 दिग्गज शेयरों में से 9 शेयरों में मजबूती के साथ ही 22 शेयरों में कमजोरी है। इस समय सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में से महिंद्रा ऐंड महिंद्रा 1.73%, अदाणी पोर्ट्स 1.46%, ओएनजीसी 0.97% और आईटीसी 0.68% ऊपर हैं। वहीं गिरने वाले शेयरों में भारती एयरटेल में 1.77%, रिलायंस इंडस्ट्रीज में 1.27%, एशियन पेंट्स में 1.09% और टाटा स्टील में 1.05% नीचे चल रहे हैं। निफ्टी के 50 शेयरों में से इस समय 18 शेयरों में बढ़त है, जबकि 32 शेयर कमजोर स्थिति में हैं। (शेयर मंथन, 06 नवंबर 2017)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख