शेयर मंथन में खोजें

गुजरात चुनाव के शुरुआती रुझानों से घबराया बाजार, फिर सँभला

आज सुबह गुजरात (Gujarat) और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के विधान सभा चुनावों (Assembly Elections) की मतगणना शुरू होने के बाद पहले दौर में एक समय गुजरात में कांग्रेस (Congress) के आगे चलने के रुझान दिखने लगे। इस रुझान ने आज शेयर बाजार का शुरुआती रुझान बिगाड़ दिया।

बीएसई का सेंसेक्स (Sensex) कल के बंद स्तर 33462.97 की तुलना में आज सुबह 33364.52 पर खुला, यानी 98 अंक नीचे। इसके बाद शुरुआती कारोबार में यह 32595.63 तक फिसल गया, जहाँ इसकी गिरावट 867 अंक की नजर आ रही थी। हालाँकि ऐसी स्थिति कुछ समय के लिए ही रही। इसके बाद के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) फिर से बहुमत की ओर दिखने लगी, जिससे बाजार भी सँभलता दिखा। करीब 10 बजे सेंसेक्स हरे निशान में भी आ गया।
एनएसई के निफ्टी 50 (Nifty 50) में शुरुआती घबराहट का असर ज्यादा दिखा। निफ्टी 50 कल के बंद स्तर 10,333 के मुकाबले आज सुबह 10,263 पर खुला, यानी 70 अंक की गिरावट के साथ। निफ्टी 50 शुरुआती मिनटों में 10,075 तक फिसला, यानी उस समय यह 258 अंक की गिरावट पर चल रहा था। हालाँकि यह भी करीब 10 बजे तक हरे निशान में आ गया। इन पंक्तियों के लिखने के समय सेंसेक्स करीब सवा दो सौ अंक और निफ्टी 50 करीब 65 अंक की मजबूती दिखा रहे हैं। इस बीच गुजरात और हिमाचल प्रदेश दोनों राज्यों में भाजपा सरकार बनाने की ओर बढ़ती दिख रही है। (शेयर मंथन, 18 दिसंबर 2017)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख