नए साल की पहली सुबह बाजार ने किसी बड़े जश्न के बजाय रजाई में दुबककर स्वागत किया। सेंसेक्स और निफ्टी की चाल देखकर यही लगा कि साल बदला है, लेकिन मूड अभी भी सर्द है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार की नजर में यह ठहराव कमजोरी नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक ठहराव है। उनका मानना है कि जैसे-जैसे रिजल्ट सीजन आगे बढ़ेगा, खासतौर पर 12 जनवरी से आईटी कंपनियों के नतीजे आना शुरू होंगे। बाजार की धड़कन भी तेज होगी। उम्मीद यही है कि इस तिमाही के नतीजे पिछले क्वार्टर से बेहतर रहेंगे और वही धीरे-धीरे बाजार को दिशा देंगे। निफ्टी के लिए फिलहाल तस्वीर साफ है। 26200 के ऊपर क्लोज मिलना जरूरी है, लेकिन असली परीक्षा 26500 के आसपास है। यही वह जोन है जहां बार-बार रेजिस्टेंस बन रहा है। जब तक 26500 दृढ़ता से नहीं निकलता और साथ में बैंक निफ्टी 60000 के ऊपर क्लोज नहीं देता, तब तक बड़े ब्रेकआउट की बात करना जल्दबाजी होगी। बाजार अभी रेंज में ही घूमता दिख सकता है और अगला हफ्ता भी ज्यादा कुछ नया संकेत नहीं दे सकता। असली स्पष्टता शायद अगले हफ्ते के दूसरे हिस्से में उभरे।
मिडकैप और स्मॉलकैप को लेकर डर जरूर है, लेकिन कहानी उतनी नेगेटिव नहीं जितनी दिखती है। मिडकैप इंडेक्स में 61,250 के ऊपर क्लोज मिलते ही तस्वीर काफी साफ हो सकती है। स्मॉलकैप में तो नेगेटिविटी पहले ही काफी हद तक फैक्टर हो चुकी है। 17,000 के आसपास मजबूत सपोर्ट यह संकेत देता है कि नीचे की गुंजाइश सीमित है। भले ही अभी चार्ट्स संघर्ष दिखा रहे हों, लेकिन लंबी अवधि में स्मॉलकैप के लिए 20,000 के ऊपर का ब्रेकआउट पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।
नया साल बाजार के लिए किसी तेज धमाके से नहीं बल्कि सोच-समझकर बढ़ने वाली कहानी से शुरू हुआ है। रेंज, इंतजार और धैर्य। यही इस वक्त के तीन सबसे बड़े शब्द हैं। जो निवेशक शोर से दूर रहकर स्तरों और ट्रेंड पर ध्यान देंगे, वही इस ठंडी शुरुआत के बाद आने वाली गर्मी का सही फायदा उठा पाएंगे।
(शेयर मंथन, 03 जनवरी 2026)
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