शेयर मंथन में खोजें

म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले क्यों हो रहे हैं परेशान? एक्सपर्ट ने समझाया लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन का असली खेल

पिछले कुछ समय से शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों में तेज गिरावट के कारण कई म्यूचुअल फंड निवेशक निराश दिखाई दे रहे हैं।

कई फंड्स ऐसे रहे हैं जिन्होंने पिछले डेढ़-दो साल में उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं दिए, जिसके चलते निवेशकों के बीच चिंता बढ़ी है। लेकिन बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि निवेशकों को म्यूचुअल फंड्स को देखने और समझने का तरीका बदलना होगा। उनके अनुसार लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन का मतलब हर समय पोर्टफोलियो का हरे रंग में दिखना नहीं होता, बल्कि लंबे समय में कुल पूंजी कितनी बढ़ी, यह ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।

शोमेश कुमार ने कहा कि म्यूचुअल फंड्स और प्रोफेशनल वेल्थ क्रिएटर्स का काम केवल किसी एक शेयर को खरीदकर वर्षों तक छोड़ देना नहीं होता। असली रणनीति यह होती है कि समय-समय पर जहां अच्छा मुनाफा मिलता है वहां प्रॉफिट बुक किया जाए और फिर उस पूंजी को उन सेक्टर्स या कंपनियों में लगाया जाए जहां आने वाले समय में बेहतर संभावनाएं दिखाई देती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में कई बार ऐसा होता है कि मौजूदा पोर्टफोलियो कुछ समय के लिए कमजोर दिखाई देता है, लेकिन कुल निवेश यात्रा में निवेशक की संपत्ति लगातार बढ़ती रहती है।

उन्होंने कहा कि आज ज्यादातर निवेशक अपने ब्रोकरेज ऐप या पोर्टफोलियो स्क्रीन पर सिर्फ यह देखते हैं कि वर्तमान होल्डिंग्स में कितना लाभ या नुकसान चल रहा है। लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि पहले जिन शेयरों में मुनाफा बुक किया गया था, वह भी उसी वेल्थ क्रिएशन का हिस्सा था। अगर किसी निवेशक ने किसी शेयर में अच्छा लाभ कमाकर उसे किसी दूसरे सेक्टर में लगाया है, तो केवल मौजूदा होल्डिंग देखकर उसकी पूरी निवेश यात्रा का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता।

उमेश कुमार के मुताबिक निवेशकों को CAGR और खासकर XIRR जैसे मापदंडों पर ध्यान देना चाहिए। XIRR यह बताता है कि समय-समय पर किए गए निवेश, निकासी और रीइन्वेस्टमेंट को मिलाकर वास्तविक रिटर्न कितना बना। यही किसी भी म्यूचुअल फंड या लॉन्ग टर्म निवेश की असली तस्वीर होती है। उनका कहना है कि अगर पांच साल के निवेश चक्र में किसी पोर्टफोलियो का औसत XIRR 15% से 20% के आसपास रहता है, तो यह बेहद अच्छा प्रदर्शन माना जाएगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बाजार हमेशा एक सीधी रेखा में ऊपर नहीं जाता। कुछ साल ऐसे आते हैं जब बाजार शानदार रिटर्न देता है, जबकि कुछ समय ऐसे भी होते हैं जब पोर्टफोलियो में गिरावट या ठहराव देखने को मिलता है। यही बाजार का स्वभाव है और इसी को “रिस्क एसेट क्लास” कहा जाता है। अगर निवेशक हर गिरावट से घबराकर बाहर निकलेंगे, तो वे बड़े लॉन्ग टर्म रिटर्न का फायदा कभी नहीं उठा पाएंगे।

शोमेश कुमार का मानना है कि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था, कंजम्प्शन आधारित सेक्टर्स और मजबूत मिडकैप-स्मॉलकैप कंपनियों में अभी भी लंबी अवधि की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। इसलिए वे निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे SIP और व्यवस्थित निवेश के जरिए बाजार में बने रहें, अच्छी क्वालिटी वाले फंड्स और सेक्टर्स चुनें और हर छोटे उतार-चढ़ाव पर प्रतिक्रिया देने के बजाय पूरे निवेश चक्र को समझकर आगे बढ़ें।

(शेयर मंथन, 27 मई 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

देश मंथन के आलेख