शेयर बाजार में हालिया तेजी के बावजूद कई ऐसे कारक हैं जो निवेशकों को सतर्क रहने का संकेत दे रहे हैं।
बाजार विशेषज्ञ सुनील सुब्रमण्यम कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है तो बाजार में एक और रैली देखने को मिल सकती है। हालांकि, केवल तेल के 90 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर हो जाने से भारतीय अर्थव्यवस्था की सभी समस्याएं खत्म नहीं होंगी। सरकार को राजकोषीय घाटे, पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) और संभावित टैक्स नीतियों के बीच संतुलन बनाना होगा। यदि सरकार घाटा बढ़ाने का रास्ता चुनती है तो रेटिंग एजेंसियों की चिंता बढ़ सकती है, वहीं कैपेक्स में कटौती आर्थिक विकास की गति को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में बाजार की मौजूदा तेजी को स्थायी मानने से पहले निवेशकों को आने वाले आर्थिक आंकड़ों और सरकारी नीतियों पर नजर रखनी चाहिए।
(शेयर मंथन, 05 जून 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)