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लोहिया कॉर्प आईपीओ : 40 साल पुराने कारोबार के दम पर बाजार में उतरी कंपनी, निवेशकों के लिए क्या हैं बड़े संकेत?

लोहिया कॉर्प (Lohia Corp) का करीब 100 करोड़ रुपये का आईपीओ निवेशकों के लिए खुल चुका है।

यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) आधारित इश्यू है, यानी कंपनी कोई नए शेयर जारी नहीं कर रही, बल्कि मौजूदा प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेच रहे हैं। कंपनी का कहना है कि कानूनी रूप से मौजूदा इकाई भले ही नई हो, लेकिन इसका मूल कारोबार पिछले 40 वर्षों से लगातार संचालित हो रहा है। हाल के वर्षों में डिमर्जर के जरिए गैर-ऑपरेटिंग एसेट्स को अलग कर बिजनेस को एक साफ-सुथरी संरचना में लाया गया है, ताकि निवेशकों के सामने केवल ऑपरेटिंग बिजनेस ही पेश किया जा सके।

कंपनी राफिया और तकनीकी टेक्सटाइल्स से जुड़ी मशीनरी बनाती है, जिनका इस्तेमाल सीमेंट, उर्वरक, केमिकल, फूड ग्रेन, जियोटेक्सटाइल, टारपोलिन और अन्य औद्योगिक उत्पादों की पैकेजिंग में होता है। लोहिया कॉर्प ने हाल के वर्षों में प्लास्टिक रिसाइक्लिंग मशीनरी और मोनोफिलामेंट मशीनों के क्षेत्र में भी विस्तार किया है। अमेरिका और इटली में किए गए अधिग्रहण और जॉइंट वेंचर के जरिए कंपनी हाई-एंड टेक्नोलॉजी वाले सेगमेंट में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है।

आईपीओ से कंपनी के पास नई पूंजी नहीं आएगी, लेकिन प्रबंधन का कहना है कि इसकी फिलहाल जरूरत भी नहीं है। कंपनी लगभग 70-72% क्षमता पर काम कर रही है और आने वाले कुछ वर्षों की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त उत्पादन क्षमता मौजूद है। प्रमोटर्स के अनुसार, शेयर बिक्री से मिलने वाली राशि का उपयोग सामाजिक और परोपकारी कार्यों, जैसे स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट्स में किया जाएगा। कंपनी का यह भी दावा है कि उसका कर्ज नियंत्रित स्तर पर है और मौजूदा नकदी प्रवाह के दम पर अगले एक से डेढ़ साल में इसे स्वाभाविक रूप से कम किया जा सकता है।

वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी का कहना है कि वह लंबे समय से 15-20% की वार्षिक राजस्व वृद्धि और करीब 20% EBITDA मार्जिन बनाए रखने का लक्ष्य रखती है। हाल के वर्षों में कंपनी की आय और मुनाफे में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज हुई है। प्रबंधन के अनुसार, बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, राफिया उत्पादों के नए उपयोग, प्लास्टिक रिसाइक्लिंग और मोनोफिलामेंट बिजनेस जैसे नए ग्रोथ इंजन भविष्य में कंपनी की वृद्धि को गति दे सकते हैं।

वैल्यूएशन के मोर्चे पर कंपनी का दावा है कि उसका आईपीओ करीब 23 के प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) मल्टीपल पर आ रहा है, जबकि समान श्रेणी की कई सूचीबद्ध कंपनियां इससे कहीं अधिक मल्टीपल पर कारोबार कर रही हैं। हालांकि, निवेशकों को केवल वैल्यूएशन ही नहीं, बल्कि कंपनी के बिजनेस मॉडल, ग्रोथ की स्थिरता, वैश्विक मांग और मशीनरी उद्योग के चक्रीय स्वभाव जैसे पहलुओं का भी सावधानी से आकलन करना चाहिए।


(शेयर मंथन, 24 जुलाई 2026)

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