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ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के ऊपर गया तो क्यों बढ़ सकती हैं बाजार की मुश्किलें?

भारतीय शेयर बाजार के लिए इस समय सबसे बड़ा जोखिम घरेलू नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें हैं।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को किसी भी तकनीकी स्तर से ज्यादा ब्रेंट क्रूड की चाल पर नजर रखनी चाहिए। जब तक ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बना रहता है, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद हालात नियंत्रण में रह सकते हैं। लेकिन यदि कीमतें 100 डॉलर के ऊपर निकल जाती हैं, तो बाजार में दबाव काफी बढ़ सकता है।

मौजूदा वैश्विक तनाव और आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण ब्रेंट क्रूड में तेजी आई है। अगर कीमतें 100 डॉलर के ऊपर स्थिर हो जाती हैं, तो इसके 120 डॉलर तक जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसका सीधा असर भारत जैसे कच्चे तेल के बड़े आयातक देश पर पड़ेगा। बढ़ती तेल कीमतें महंगाई, चालू खाते के घाटे और कॉरपोरेट लागत पर दबाव बढ़ा सकती हैं, जिसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई देगा।

ऐसे माहौल में निवेशकों को केवल शेयरों की कीमतों पर नहीं, बल्कि वैश्विक कमोडिटी बाजार और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर भी नजर रखनी चाहिए। यदि ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के नीचे रहता है तो बाजार में गिरावट सीमित रह सकती है, लेकिन इस स्तर के ऊपर जाने पर निवेश रणनीति में सतर्कता बढ़ाना जरूरी होगा। फिलहाल विशेषज्ञ 'वेट एंड वॉच' की रणनीति अपनाने और जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।


(शेयर मंथन, 28 जुलाई 2026)

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