शेयर मंथन में खोजें

मुथूट फाइनेंस में करेक्शन कितना और, कब बनेगा खरीदारी का मौका?

मुथूट फाइनेंस में लंबी अवधि के निवेश को लेकर सबसे बड़ा सवाल मौजूदा करेक्शन और वैल्यूएशन का है। शेयर ने लगभग ₹900 से बढ़कर ₹4,000 के आसपास तक का सफर तय किया है।

इतनी लंबी और मजबूत तेजी के बाद शेयर में गिरावट आना सामान्य बात हो सकती है, लेकिन निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि करेक्शन कहां तक जा सकता है और किस स्तर पर दोबारा तेजी के संकेत मिल सकते हैं। बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि मौजूदा समय में कंपनी का प्राइस-टू-बुक करीब 2.8 बताया जा रहा है। विशेषज्ञ के अनुसार, 2 से 2.5 के आसपास का प्राइस-टू-बुक ज्यादा आरामदायक वैल्यूएशन माना जा सकता है, जबकि 2.8 पर शेयर कुछ महंगा नजर आता है। यही वजह है कि मौजूदा स्तर पर केवल इस उम्मीद में खरीदारी करना कि शेयर पहले की तरह तेजी से ऊपर जाएगा, जोखिम भरा हो सकता है। निवेशकों को बेहतर एंट्री के लिए करेक्शन या ट्रेंड रिवर्सल का इंतजार करना चाहिए।

तकनीकी स्तरों की बात करें तो शेयर में 38 फीसदी रिट्रेसमेंट का जोन करीब 2,875 से 2,900 रुपये के आसपास महत्वपूर्ण दिखाई देता है। हालांकि, उपलब्ध डेटा में निचले स्तर को लेकर कुछ अंतर भी देखने को मिला है, इसलिए किसी एक स्तर को बिल्कुल निश्चित सपोर्ट मानना उचित नहीं होगा। अगर करेक्शन आगे बढ़ता है तो निवेशकों को अगले सपोर्ट जोन और शेयर के प्राइस एक्शन को ध्यान से देखना चाहिए।

दूसरी तरफ, अगर शेयर गिरावट के बाद फिर से मजबूती दिखाता है तो ट्रेंड रिवर्सल एक महत्वपूर्ण संकेत बन सकता है। डेली चार्ट पर करीब 3,175 रुपये के ऊपर जाने के बाद ट्रेंड में सुधार के संकेत मिल सकते हैं। इसके बाद करीब 3,150 रुपये के आसपास बने पिछले हाई के ऊपर टिकना शेयर में दोबारा मोमेंटम आने का संकेत दे सकता है। ऐसे में जो निवेशक अभी बाहर हैं, उनके लिए ट्रेंड की पुष्टि के बाद निवेश पर विचार करना ज्यादा बेहतर हो सकता है।

मुथूट फाइनेंस में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए रणनीति इस बात पर निर्भर करेगी कि वे किस वैल्यूएशन पर निवेश करने में सहज हैं और कितना जोखिम उठा सकते हैं। शेयर में कंपनी की मजबूत स्थिति के बावजूद हाल की तेजी और मौजूदा प्राइस-टू-बुक को देखते हुए जल्दबाजी जरूरी नहीं है। बेहतर तरीका यह हो सकता है कि निवेशक करेक्शन को ट्रैक करें, महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों पर नजर रखें और ट्रेंड में स्पष्ट सुधार आने के बाद ही नई पोजीशन पर विचार करें।

इस तरह मुथूट फाइनेंस में फिलहाल फोकस केवल यह देखने पर नहीं होना चाहिए कि शेयर कितना गिर सकता है, बल्कि इस बात पर भी होना चाहिए कि गिरावट के बाद खरीदारी का जोखिम-रिटर्न अनुपात कब बेहतर होता है। निवेशकों को किसी भी Buy, Sell या Hold फैसले से पहले कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन, तकनीकी संकेतों और अपनी निवेश अवधि के आधार पर स्वतंत्र रिसर्च जरूर करनी चाहिए।


(शेयर मंथन, 21 अगस्त 2026)

(आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

देश मंथन के आलेख