भारतीय शेयर बाजार में फिलहाल दबाव का माहौल बना हुआ है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि निफ्टी पूरे दिन एक सीमित दायरे में दबाव के साथ कारोबार करता रहा और बीच में थोड़ी देर के लिए तेजी जरूर दिखाई दी, लेकिन अंत में बाजार का रुख कमजोर रहा। बाजार विश्लेषक सोमेश कुमार के मुताबिक, मौजूदा स्थिति को सकारात्मक नहीं कहा जा सकता, क्योंकि बाजार को संभालने वाले प्रमुख संकेतक HDFC Bank और Reliance का सहारा कमजोर पड़ा है, जबकि IT सेक्टर में भी गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे माहौल में फिलहाल बाजार में मजबूती की बजाय सपोर्ट मिलने का इंतजार करना बेहतर होगा।
विश्लेषक के मुताबिक, निफ्टी में अब 'सेल ऑन राइज' की स्थिति बनती जा रही है। पहले जहां करीब 24,400 के स्तर पर दबाव दिखाई दिया था, वहीं अब लगभग 24,000 का स्तर ऊपर की तरफ एक अहम रुकावट बन गया है। ऐसे में बाजार के लिए सबसे जरूरी संकेत यह होगा कि निफ्टी दोबारा 24,000 के ऊपर मजबूती से लौटता है या नहीं। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक बाजार की दिशा को नकारात्मक मानकर चलने की बात कही गई है।
नीचे की तरफ 23,475 और उसके बाद करीब 23,100 के आसपास के स्तरों पर नजर रखी जा सकती है। विश्लेषक के मुताबिक, बाजार ओवरसोल्ड जोन में पहुंच चुका है, इसलिए बीच में बाउंस आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। भारतीय बाजार की प्रकृति ऐसी रही है कि गिरावट और तेजी दोनों कई बार तेज गति से आती हैं। इसलिए ओवरसोल्ड स्थिति के कारण शॉर्ट-कवरिंग या बाउंस मिल सकता है, लेकिन इसे तुरंत ट्रेंड रिवर्सल नहीं माना जाना चाहिए।
मौजूदा कमजोरी के पीछे वैश्विक और घरेलू दोनों तरह के संकेत जिम्मेदार हैं। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के ऊपर बनी हुई हैं और आगे 105-110 डॉलर की रेंज में जाने की आशंका भी जताई गई है। इसके अलावा अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में तेजी भी बाजार के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में निवेशकों को फिलहाल जल्दबाजी में इंडेक्स पर बड़ा दांव लगाने के बजाय सपोर्ट और रिवर्सल के स्पष्ट संकेतों का इंतजार करना चाहिए।
(शेयर मंथन, 11 सितंबर 2026)
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