कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के प्रबंध निदेशक एवं सह-प्रमुख संजीव प्रसाद के अनुसार, भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति (मैक्रो) वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही अथवा पूरे वित्त वर्ष 2026-27 में पश्चिम एशिया संकट की तीव्रता और अवधि के आधार पर खराब, या और भी खराब हो सकती है।
अपनी ताजा रणनीतिक टिप्पणी (स्ट्रेटेजी नोट) में उन्होंने कहा है कि फिलहाल वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आय (अर्निंग्स) का परिदृश्य अच्छा है, हालाँकि लंबे समय तक संघर्ष जारी रहने की स्थिति में यह बिगड़ सकता है। बाजार मूल्यांकन इस समय क्षेत्रों और शेयरों के आधार पर अच्छे, खराब या बहुत खराब (अत्यधिक महँगे) नजर आते हैं। चौथी तिमाही (4QFY26) के नतीजे संतोषजनक रहे, लेकिन 2026-27 की पहली तिमाही उतार-चढ़ाव भरी रह सकती है।
आय परिदृश्य (Earnings outlook) अच्छा
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि निफ्टी-50 सूचकांक के शुद्ध लाभ (net profits) में 2025-26 में केवल 8% की सुस्त वृद्धि के बाद 2026-27 में 18% और 2027-28 में 14% वृद्धि का अनुमान है। इस बारे में संजीव प्रसाद की टिप्पणी है कि 2026-27 में मजबूत आय वृद्धि वापस लौटने का अनुमान भारत के चुनौतीपूर्ण व्यापक आर्थिक माहौल से उल्टा प्रतीत हो सकता है। पर यह मजबूत वृद्धि दो बातों को दर्शाती है। पहली बात, बाजार के शुद्ध लाभ की विशेष संरचना, जिसमें वैश्विक कमोडिटी, वैश्विक सेवाओं एवं उत्पादों और यूटिलिटी कंपनियों के लाभ का बड़ा हिस्सा शामिल है। दूसरी बात यह है कि वित्तीय क्षेत्र के लिए 2025-26 का आधार भी अपेक्षाकृत कम रहा है (लो बेस)।
हालाँकि यदि वैश्विक तेल एवं गैस आपूर्ति में अपेक्षा से अधिक समय तक व्यवधान बना रहता है और कच्चे माल की कीमतें अनुमान से अधिक बढ़ती हैं, तो घरेलू उपभोग क्षेत्रों (consumption sectors) की आय में कटौती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
व्यापक आर्थिक परिदृश्य (Macro outlook) खराब, या बहुत खराब
रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया का युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक तेल एवं गैस कीमतों में वृद्धि के कारण भारत का व्यापक आर्थिक परिदृश्य कमजोर हुआ है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही और पूरे वर्ष की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि वर्तमान संघर्ष कितना लंबा और कितना व्यापक होता है तथा पश्चिम एशिया से तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति एवं कीमतों पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है।
उच्च तेल कीमतें भारत के चालू खाता घाटा (CAD), भुगतान संतुलन (BoP), राजकोषीय घाटे (fiscal deficit), आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति के लिए नकारात्मक हैं। कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव रैखिक (यानी समान अनुपात में) नहीं होता। आधारभूत परिदृश्य (बेस केस) में यह माना गया है कि पश्चिम एशिया का युद्ध अगले कुछ दिनों या हफ्तों में समाप्त हो जायेगा और उसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को धीरे-धीरे फिर से खोल दिया जायेगा।
मूल्यांकन कहीं अच्छे, कहीं बुरे, कहीं बहुत बुरे
पिछले कुछ सप्ताहों में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के बाद भारतीय बाजार का मूल्यांकन मिश्रित स्थिति में दिखायी देता है। रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य रूप से देखें तो (1) उपभोग क्षेत्र के शेयर महँगे हैं, (2) वित्तीय क्षेत्र के मूल्यांकन आकर्षक से लेकर उचित स्तरों पर हैं, (3) निवेश से जुड़े शेयर अत्यधिक महँगे हैं, और (4) आउटसोर्सिंग क्षेत्र यानी आईटी सेवाएँ और दवा शेयरों के मूल्यांकन उचित से लेकर महँगे स्तरों तक हैं, चाहे कंपनी का आकार या क्षमता कुछ भी हो।
इस रिपोर्ट में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों के कुछ हिस्सों, डिजिटलीकरण एवं विद्युतीकरण जैसे कुछ विशिष्ट विषय (थीम) आधारित शेयरों तथा सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) के कुछ शेयरों में अति-उत्साह (फ्रॉथ) दिखायी देने की बात कही गयी है। संकट के दौरान भी खुदरा निवेशकों की धारणा मजबूत बनी रही है, जबकि उच्च वर्ग निवेशकों (HNI) में कुछ विषयों (थीम) को लेकर अत्यधिक उत्साह देखा गया है।
चौथी तिमाही संतोषजनक, अगली तिमाही चुनौतीपूर्ण
रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 की चौथी तिमाही में निफ्टी-50 सूचकांक की शुद्ध आय (net income) 6.6% बढ़ी, जबकि अनुमान 2.2% वृद्धि का था। इसी अवधि में केआईई कवरेज यूनिवर्स यानी कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की समीक्षा में शामिल कंपनियों की शुद्ध आय 14% बढ़ी, जबकि अनुमान 7.3% वृद्धि का था। निफ्टी-50 की एबिटा आय (EBITDA) 6.6% बढ़ी, जबकि अनुमान 7.1% वृद्धि का था। वहीं, केआईई यूनिवर्स की एबिटा आय 12% बढ़ी, जो 10.1% वृद्धि के अनुमान से अधिक रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि चौथी तिमाही के नतीजे संतोषजनक रहे, लेकिन अगली तिमाही कुछ हद तक उतार-चढ़ाव भरी रह सकती है। (शेयर मंथन, 2 जून 2026)
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