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बजट की जादुई टोपी से क्या निकलेगा, शेयर बाजार को क्या-क्या उम्मीद है?

बजट से जुड़ी उम्मीदों को अगर कल्पना की उड़ान दी जाए और मान लिया जाए कि वित्त मंत्री के पास जादूगर की टोपी है, तो सवाल यही है कि उस टोपी से इक्विटी बाजार के लिए कौन-सा “कबूतर” निकल सकता है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि सबसे बड़ा और असरदार कदम वही होगा, जो लॉन्ग टर्म निवेशकों को राहत दे सके। पिछले कुछ वर्षों में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स का दायरा शून्य से 10%, फिर 10% से 12.5% तक पहुंचा है। इस बदलाव ने खासतौर पर विदेशी निवेशकों (FII) के रिटर्न को काफी नुकसान पहुंचाया है, क्योंकि एक तरफ करेंसी डिप्रिसिएशन है और दूसरी तरफ कॉरपोरेट अर्निंग्स की ग्रोथ उतनी मजबूत नहीं रही।

अक्सर यह चर्चा होती है कि हाल ही में बढ़ाए गए टैक्स को सरकार तुरंत वापस कम कर देगी, लेकिन ऐसा होना आसान नहीं दिखता। नीतियां आमतौर पर किसी “मेंटल ब्लॉक” से नहीं बदली जातीं। हालांकि, इंडस्ट्री की ओर से लगातार यह मांग जरूर उठ रही है कि लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन को पीनलाइज नहीं बल्कि इंसेंटिवाइज किया जाना चाहिए। मौजूदा ढांचे में ऐसा महसूस होता है कि हर बजट में लॉन्ग टर्म निवेश को धीरे-धीरे महंगा बनाया जा रहा है, जबकि असल जरूरत इसके उलट है।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स फिर से शून्य किया जाए। इसके बदले सरकार चाहें तो होल्डिंग पीरियड बढ़ा सकती है, जैसे तीन साल का नियम। इससे न तो निवेशकों को बड़ी परेशानी होगी और न ही सिस्टम में कोई बड़ा असंतुलन आएगा, क्योंकि कई निवेश वैसे भी तीन साल या उससे ज्यादा समय के लिए किए जाते हैं। जब इकॉनमी ग्रोथ से बहुत मजबूत रिटर्न नहीं मिल रहे हों, तब टैक्स स्ट्रक्चर ही ऐसा होना चाहिए जो निवेश को सहारा दे।

अगर सरकार इस मोर्चे पर कोई राहत देती है, तो सबसे पहले एफआईआई का भरोसा लौटेगा। एफआईआई की वापसी से बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी, शेयरों में खरीदारी आएगी और उसका फायदा घरेलू निवेशकों को भी मिलेगा। भले ही पूरा फायदा एफआईआई को जाए, लेकिन उसका 40–50% असर तो आम निवेशकों के पोर्टफोलियो में भी दिखेगा। बाजार में जब खरीदारी बढ़ती है, तो कैपिटल गेन अपने-आप बेहतर होता है।

एक दूसरा व्यावहारिक रास्ता यह भी हो सकता है कि सरकार एसटीटी (सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स) और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के बीच संतुलन बनाए। पहले जब एलटीसीजी हटाया गया था, तब एसटीटी लाया गया था। अब एलटीसीजी वापस लाकर उसे और बढ़ा देना कई लोगों को डबल टैक्सेशन जैसा लगता है। अगर इस असंतुलन को थोड़ा भी ठीक कर दिया जाए, तो यह न सिर्फ निवेश को बढ़ावा देगा बल्कि बाजार की वोलैटिलिटी को भी कम करने में मदद करेगा।

बजट से सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि इन्वेस्टमेंट को प्रमोट किया जाए, ट्रेडिंग को नहीं। ट्रेडिंग से वैसे भी ज्यादातर लोगों को लंबी अवधि में खास फायदा नहीं होता, यह बात सेबी खुद कह चुकी है। ऐसे में अगर ट्रेडिंग पर थोड़ा अतिरिक्त बोझ पड़ भी जाए, तो उससे बाजार को बड़ा नुकसान नहीं होगा। असली जादू वही होगा, जब बजट लॉन्ग टर्म निवेशकों को यह भरोसा दिला दे कि वेल्थ क्रिएशन को सजा नहीं, सम्मान मिलेगा।


(शेयर मंथन, 28 जनवरी 2026)

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