हाल के समय में शेयर बाजार में आई तेज उतार-चढ़ाव ने आईपीओ (IPO) बाजार पर भी स्पष्ट असर डाला है।
इस पर चर्चा करते हुए प्राइम डेटाबेस के एमडी प्रणव हदिया ने बताया कि प्राइमरी मार्केट यानी आईपीओ बाजार काफी हद तक सेकेंडरी मार्केट पर निर्भर करता है। जब शेयर बाजार में अस्थिरता या कमजोरी रहती है, तो कंपनियां अपने आईपीओ लॉन्च करने से बचती हैं। यही कारण है कि हाल के महीनों में कई आईपीओ टल गए हैं और नए इश्यू की गति धीमी पड़ गई है। हालांकि, सेबी ने ऐसी कंपनियों को राहत देते हुए समयसीमा में छूट दी है, ताकि वे बेहतर बाजार हालात में अपने इश्यू ला सकें।
प्रणव हदिया के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब आईपीओ बाजार में ऐसी सुस्ती आई हो। पिछले कई दशकों के आंकड़े बताते हैं कि जब भी बाजार में अस्थिरता बढ़ती है, आईपीओ गतिविधियां घट जाती हैं। वर्तमान में करीब 150 कंपनियां ऐसी हैं जिनके पास सेबी की मंजूरी है और वे किसी भी समय आईपीओ ला सकती हैं। इसके अलावा, मार्च महीने में बड़ी संख्या में कंपनियों ने अपने ड्राफ्ट पेपर्स जमा किए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि कंपनियां भविष्य में बाजार सुधरने की उम्मीद में तैयार रहना चाहती हैं।
आईपीओ में ओएफएस (Offer for Sale) को लेकर उठने वाले सवालों पर भी उन्होंने स्पष्ट किया कि बाजार अवसरवाद (opportunism) पर ही चलता है। प्रमोटर्स और प्राइवेट इक्विटी निवेशकों के लिए एग्जिट का रास्ता जरूरी होता है, क्योंकि इसी के जरिए वे अपना रिटर्न हासिल कर पाते हैं और आगे नए निवेश कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पहले के समय में ज्यादातर आईपीओ फ्रेश कैपिटल जुटाने के लिए आते थे, लेकिन अब कंपनियां पहले प्राइवेट निवेशकों से फंडिंग लेकर एक स्तर तक पहुंचती हैं और उसके बाद आईपीओ लाती हैं।
वैल्यूएशन को लेकर निवेशकों की चिंता पर उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह एक कला है, न कि सटीक विज्ञान। हर निवेशक का नजरिया अलग होता है, इसलिए बाजार चलता है। हालांकि कंपनियां और मर्चेंट बैंकर्स भी यह सुनिश्चित करते हैं कि आईपीओ पूरी तरह विफल न हो और कम से कम सब्सक्रिप्शन मिल जाए। उन्होंने यह भी माना कि निवेशकों को बिना सोचे-समझे निवेश नहीं करना चाहिए, क्योंकि आईपीओ एक जोखिम भरा निवेश होता है, खासकर जब कंपनी का लंबा ट्रैक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होता।
न्यू एज टेक कंपनियों के आईपीओ को लेकर भी मिश्रित अनुभव सामने आए हैं। कुछ कंपनियों ने अच्छा रिटर्न दिया है, जबकि कई निवेशकों को नुकसान भी हुआ है। ऐसे में जरूरी है कि निवेशक हर आईपीओ को अलग-अलग आधार पर जांचें, जैसे कंपनी का बिजनेस मॉडल, फाइनेंशियल स्थिति, मैनेजमेंट की गुणवत्ता और वैल्यूएशन। उन्होंने यह भी कहा कि यह उम्मीद करना गलत है कि हर आईपीओ लिस्टिंग पर या बाद में मुनाफा ही देगा।
निवेशकों के लिए सबसे अहम सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि पहले अपनी रणनीति तय करें—क्या आप लिस्टिंग गेन के लिए निवेश कर रहे हैं या लंबी अवधि के लिए। अगर आप सिर्फ लिस्टिंग के लिए निवेश कर रहे हैं, तो लिस्टिंग के दिन ही एग्जिट करना बेहतर होता है। वहीं, अगर आप लॉन्ग टर्म निवेशक हैं, तो कंपनी के ड्राफ्ट पेपर्स (DRHP) को ध्यान से पढ़ें और पूरी रिसर्च के बाद ही निवेश करें। कुल मिलाकर, मौजूदा समय में आईपीओ बाजार में सतर्कता और समझदारी के साथ कदम उठाना ही निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित रणनीति है।
(शेयर मंथन, 06 मई 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)