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क्या ऑटो, फार्मा और पावर बनेंगे बाजार के अगले सुपरस्टार सेक्टर?

भारतीय शेयर बाजार में इस समय सेक्टर रोटेशन का दौर देखने को मिल रहा है। जहां कुछ सेक्टर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं कुछ बड़े सेक्टर फिलहाल अंडरपरफॉर्म करते दिखाई दे रहे हैं।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि खासतौर पर बीएफएसआई और आईटी सेक्टर को लेकर बाजार में फिलहाल ज्यादा उत्साह नजर नहीं आ रहा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बीएफएसआई में अभी “वेट एंड वॉच” का माहौल है, जबकि आईटी सेक्टर पर वैश्विक अनिश्चितताओं का दबाव बना हुआ है। ऐसे माहौल में निवेशकों को उन सेक्टर्स पर ध्यान देना चाहिए जहां अगले कुछ सालों में मजबूत ग्रोथ साइकिल बनने की संभावना दिखाई दे रही है।

सबसे पहला सेक्टर ऑटो बताया जा रहा है। ऑटो इंडेक्स के चार्ट्स यह संकेत दे रहे हैं कि सेक्टर एक नए हाई की तरफ बढ़ सकता है। खास बात यह है कि निवेशकों को केवल बड़ी ऑटो कंपनियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऑटो एंसिलरी और कंपोनेंट सप्लायर्स पर भी नजर रखनी चाहिए। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और नई टेक्नोलॉजी के चलते “कंटेंट पर व्हीकल” तेजी से बढ़ने वाला है। यानी वाहनों में ज्यादा टेक्नोलॉजिकल कंपोनेंट्स लगेंगे, जिसका फायदा उन कंपनियों को मिलेगा जो ऑटोमेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजाइनिंग से जुड़े पार्ट्स सप्लाई करती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बड़े रिटर्न के लिए मिडकैप और स्मॉलकैप ऑटो एंसिलरी कंपनियां बेहतर अवसर दे सकती हैं।

दूसरा बड़ा अवसर फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में नजर आ रहा है। फार्मा इंडेक्स पिछले करीब दो साल से खास प्रदर्शन नहीं कर पाया है, इसलिए इसमें अब 15 से 20 प्रतिशत तक की तेजी की संभावना जताई जा रही है। हालांकि निवेशकों को यहां सावधानी के साथ चुनाव करना होगा। एक्सपर्ट्स की राय है कि उन कंपनियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जिनका 80 प्रतिशत या उससे ज्यादा बिजनेस घरेलू बाजार से आता हो। एक्सपोर्ट आधारित कंपनियों पर फिलहाल वैश्विक अनिश्चितताओं का खतरा बना रह सकता है। फार्मा रिटेल, एपीआई, सीडीएमओ और डायग्नोस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में बेहतर मौके दिखाई दे रहे हैं। वहीं अस्पताल सेक्टर में क्वालिटी कंपनियां जरूर हैं, लेकिन उनके वैल्यूएशन काफी महंगे हो चुके हैं, इसलिए वहां निवेश को ट्रेडिंग या टैक्टिकल अप्रोच के साथ देखना चाहिए।

तीसरा सेक्टर कैपिटल गुड्स का है, जिसे लेकर बाजार में काफी सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं। कोविड के बाद 2020 से 2024 तक इस सेक्टर में एक लंबा तेजी का दौर देखने को मिला था और अब फिर से नए साइकिल की शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह दौर पहले जितना लंबा नहीं होगा, लेकिन करीब ढाई साल तक मजबूत तेजी बनी रह सकती है। निवेशकों को यहां इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों की बजाय उन एंसिलरी कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए जो मशीनरी, पंप, मोल्डिंग, रिफ्रेक्टरीज और इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट्स के पार्ट्स सप्लाई करती हैं। इन कंपनियों में मार्जिन बेहतर होते हैं और कमाई की स्थिरता भी ज्यादा होती है।

पावर सेक्टर को लेकर एक्सपर्ट्स थोड़ा सतर्क जरूर हैं, लेकिन इसके बावजूद इसमें एक और बड़ा रन देखने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा। पावर इंडेक्स पहले ही लंबी तेजी दिखा चुका है, लेकिन चार्ट्स यह संकेत दे रहे हैं कि इसमें अभी एक और मजबूत उछाल बाकी हो सकता है। हालांकि यहां सबसे बड़ी चुनौती सही स्टॉक्स चुनने की है क्योंकि कई कंपनियों के वैल्यूएशन काफी महंगे हो चुके हैं। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि निवेशकों को अत्यधिक महंगे रिन्यूएबल एनर्जी स्टॉक्स की बजाय पारंपरिक पावर और पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

बाजार में इस समय चार बड़े थीम उभरकर सामने आ रहे हैं। ऑटो, फार्मा एवं हेल्थकेयर, कैपिटल गुड्स और पावर। लेकिन केवल सेक्टर पहचान लेना ही काफी नहीं है। सही कंपनियों का चुनाव सबसे अहम है। जहां इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी कंपनियों में कम मार्जिन और ज्यादा जोखिम होता है, वहीं एंसिलरी और सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियां बेहतर और स्थिर रिटर्न दे सकती हैं। आने वाले समय में निवेशकों के लिए यही रणनीति सबसे ज्यादा फायदे का सौदा साबित हो सकती है।

(शेयर मंथन, 11 मई 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

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