ओबेरॉय रियल्टी के शेयरों में हालिया उतार-चढ़ाव के बीच तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल शेयर का दीर्घकालिक ट्रेंड सकारात्मक बना हुआ है, लेकिन वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों के कारण निकट अवधि में अस्थिरता बनी रह सकती है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि कंपनी के हालिया वित्तीय नतीजे साल-दर-साल आधार पर संतोषजनक रहे हैं, जबकि तिमाही आधार पर कुछ कमजोरी देखने को मिली है। इसके बावजूद नतीजे इतने कमजोर नहीं हैं कि शेयर के दीर्घकालिक ट्रेंड पर बड़ा असर डालें।
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार ₹1,800 का स्तर Oberoi Realty के लिए सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। जब तक शेयर इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तब तक मौजूदा तेजी का मोमेंटम कायम रह सकता है। यदि शेयर 1,800 रुपये के नीचे बंद होता है, तो तेजी की रफ्तार कमजोर पड़ सकती है, हालांकि इससे लंबी अवधि का ट्रेंड तुरंत नकारात्मक नहीं होगा। विश्लेषकों का कहना है कि वास्तविक ट्रेंड तभी कमजोर माना जाएगा जब शेयर लगभग 1,570 रुपये के प्रमुख सपोर्ट के नीचे फिसल जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों और बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए। यदि शेयर प्रमुख सपोर्ट स्तरों के ऊपर बना रहता है, तो अगले तिमाही नतीजों और बाजार की स्थिति में सुधार के साथ इसमें दोबारा तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसे में निवेशकों के लिए तकनीकी स्तरों पर नजर बनाए रखना और जोखिम प्रबंधन के साथ निवेश करना अधिक उपयुक्त रणनीति होगी।
(शेयर मंथन, 29 जुलाई 2026)
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