होम फर्स्ट फाइनेंस (Home First Finance) को लेकर एक निवेशक ने लंबी अवधि के नजरिए से राय मांगी।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि होम फर्स्ट फाइनेंस का कारोबार मुख्य रूप से अफोर्डेबल हाउसिंग फाइनेंस से जुड़ा है। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रियल एस्टेट बाजार का रुझान बदल चुका है। पहले जहां अफोर्डेबल हाउसिंग को बड़ी संभावना वाला क्षेत्र माना जाता था, वहीं अब बाजार में महंगे और प्रीमियम घरों की मांग अपेक्षाकृत अधिक दिखाई दे रही है। ऐसे में अफोर्डेबल हाउसिंग से जुड़ी कंपनियों के लिए तेज ग्रोथ हासिल करना आसान नहीं रह गया है।
उन्होंने कहा कि आज घर केवल रहने की जरूरत नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक भी बन गया है। इसी वजह से खरीदारों का झुकाव बेहतर लोकेशन, बड़े आकार और प्रीमियम प्रोजेक्ट्स की ओर बढ़ा है। विशेषज्ञ ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे Tata Nano को कम कीमत वाली कार के रूप में पेश किया गया, लेकिन उपभोक्ताओं ने उसे स्टेटस सिंबल के रूप में स्वीकार नहीं किया। उसी तरह अफोर्डेबल हाउसिंग की अवधारणा भी अपेक्षित स्तर की मांग पैदा नहीं कर सकी।
एक्सपर्ट का मानना है कि कई बड़े डेवलपर्स ने भी अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर काम किया, लेकिन इस श्रेणी में व्यापक मांग देखने को नहीं मिली। इसका असर उन हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों पर भी पड़ सकता है, जिनका प्रमुख फोकस इसी सेगमेंट पर है।
ऐसे में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सलाह है कि हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में निवेश करते समय केवल कंपनी का नाम नहीं, बल्कि उसके ग्राहक वर्ग और बिजनेस मॉडल को भी समझें। एक्सपर्ट के अनुसार भविष्य में प्रीमियम हाउसिंग और उच्च आय वर्ग को ऋण देने वाली कंपनियों के लिए अवसर अपेक्षाकृत बेहतर हो सकते हैं। इसलिए निवेश से पहले यह देखना जरूरी है कि कंपनी किस सेगमेंट पर अधिक निर्भर है और उसकी दीर्घकालिक विकास रणनीति कितनी मजबूत है।
(शेयर मंथन, 31 जुलाई 2026)
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