भारतीय शेयर बाजार में बीते हफ्ते एक बार फिर कमजोरी देखने को मिली।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि निफ्टी 24,000 के स्तर को पार कर नीचे आया और इसके बाद करीब 23,900 के आसपास कारोबार करता नजर आया। हालांकि बाजार में गिरावट के बावजूद अभी ऐसी स्थिति नहीं दिख रही है कि निवेशकों के बीच किसी बड़े पैनिक की स्थिति बन गई हो। बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार के मुताबिक, फिलहाल निफ्टी का शॉर्ट टर्म डायरेक्शन नीचे की तरफ है और जब तक इंडेक्स 24,400 के ऊपर मजबूती से वापस नहीं आता, तब तक बाजार में पॉजिटिव बायस लेकर चलना उचित नहीं होगा।
बाजार में कमजोरी का स्पष्ट कारण भी फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों की बात करें तो ब्रेंट क्रूड अभी 97 डॉलर के स्तर को पार नहीं कर रहा है, इसके बावजूद बाजार में डर बना हुआ है। यही वजह है कि अलग-अलग इंडेक्स और मार्केट कैप सेगमेंट का व्यवहार भी एक जैसा नहीं दिख रहा है। स्मॉलकैप, मिडकैप और माइक्रोकैप में अलग-अलग तरह की चाल देखने को मिल रही है। इस तरह के बाजार में सिर्फ इंडेक्स की दिशा देखकर पूरी रणनीति बनाना मुश्किल हो जाता है।
विश्लेषक के अनुसार, निफ्टी के लिए फिलहाल 24,400 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण है। जब तक इंडेक्स इस स्तर के ऊपर नहीं जाता, तब तक ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति बेहतर है। मौजूदा स्थिति में 23,775 से 24,400 के बीच की रेंज को ट्रेडिंग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्रेडर्स के लिए इस रेंज में ‘सेल ऑन राइज’ की रणनीति अपनाने की बात कही गई है। यानी बाजार में तेजी आने पर तुरंत खरीदारी करने के बजाय महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तरों के आसपास कमजोरी के संकेतों पर नजर रखना ज्यादा बेहतर हो सकता है।
अगर निफ्टी 23,775 के स्तर को भी decisively तोड़ता है, तो इसके बाद बाजार में और नीचे के स्तर देखने को मिल सकते हैं। 23,475 के आसपास अगला स्तर और उसके बाद 23,000 का स्तर महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि इन स्तरों को किसी निश्चित लक्ष्य की तरह नहीं, बल्कि संभावित सपोर्ट जोन के तौर पर देखना चाहिए। बाजार की दिशा बदलने पर पूरी रणनीति भी बदल सकती है।
इस समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निवेशक और ट्रेडर बाजार की बदली हुई दिशा का सम्मान करें। हर गिरावट को तुरंत बड़ी खरीदारी का अवसर मानना सही रणनीति नहीं हो सकती। जब तक निफ्टी 24,400 के ऊपर वापस नहीं आता, तब तक शॉर्ट टर्म में सावधानी बनाए रखना जरूरी है। वहीं, अगर 23,775 के नीचे कमजोरी बढ़ती है, तो ट्रेडर्स को आगे के सपोर्ट स्तरों के लिए तैयार रहना होगा।
(शेयर मंथन, 07 सितंबर 2026)
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