बैंकिंग इंडेक्स में पिछले सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन अच्छी वापसी देखने को मिली, लेकिन क्या इसे ट्रेंड बदलने का पक्का संकेत माना जाए?
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि फिलहाल बैंकिंग इंडेक्स की इस तेजी को लेकर बहुत ज्यादा आश्वस्त होने की जरूरत नहीं है। शुक्रवार की रिकवरी में HDFC Bank की अहम भूमिका रही है। हालांकि, एक्सपर्ट इस खरीदारी को फिलहाल शॉर्ट कवरिंग के तौर पर देख रहे हैं। उनके मुताबिक बैंकिंग इंडेक्स में नई दिशा तभी स्पष्ट होगी, जब कुछ अहम स्तर decisively पार किए जाएं।
HDFC Bank के लिए 735 रुपये के स्तर को बेहद महत्वपूर्ण बताया है। उनके मुताबिक 24 अगस्त के आसपास 735 रुपये के स्तर से स्टॉक में सप्लाई शुरू हुई थी और यही स्तर अब आगे की चाल के लिए अहम बन गया है। अगर HDFC Bank 735 रुपये के ऊपर मजबूती से टिकता है, तो बैंकिंग इंडेक्स के सेंटीमेंट में भी काफी सकारात्मक बदलाव आ सकता है। वहीं, जब तक यह स्तर निर्णायक रूप से पार नहीं होता, तब तक HDFC Bank बैंकिंग इंडेक्स के लिए दबाव और रुकावट पैदा कर सकता है।
बैंकिंग इंडेक्स की बात करें तो 57,000 के आसपास से कंजेशन यानी रुकावट शुरू होने की संभावना जताई गई है। वहीं 58,000 का स्तर इंडेक्स के लिए निर्णायक माना जा रहा है। एक्सपर्ट के मुताबिक जब तक बैंकिंग इंडेक्स 58,000 के ऊपर नहीं निकलता, तब तक इसमें किसी नए डायरेक्शन की पुष्टि नहीं होगी। ऐसे में 58,000 के नीचे की तेजी को फिलहाल 'सेल ऑन राइज' रणनीति के नजरिए से देखने की बात कही गई है।
अगर बैंकिंग इंडेक्स में कमजोरी दोबारा आती है तो 54,000 का स्तर एक अहम बेंचमार्क हो सकता है। यानी 58,000 के ऊपर ब्रेकआउट नहीं आने तक करीब 10 फीसदी का एक बड़ा ट्रेडिंग बैंड बाजार को परेशान कर सकता है। एक्सपर्ट के मुताबिक निवेशकों को इस पूरे दायरे में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए और केवल शुक्रवार की रिकवरी के आधार पर ट्रेंड बदलने की धारणा नहीं बनानी चाहिए।
(शेयर मंथन, 15 सितंबर 2026)
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