शेयर मंथन में खोजें

एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स

संसद सत्र से नामउम्मीदी के चलते शेयर बाजार में गिरावट

हफ्ते के दूसरे दिन आज भी भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। दरअसल संसद का मानसून सत्र कारोबारियों में कोई उम्मीद जताने में विफल रहा। सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) ने आज सुबह कारोबार की शुरुआत मामूली गिरावट के साथ की, लेकिन कुछ ही देर में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में आ गये लेकिन बाद में बाजार फिर कमजोर हो गया और सत्र के अंत में दोनों सूचकांक गिरावट के साथ ही बंद हुए। आज सुबह बीएसई (BSE) में सेंसेक्स 28,381.82 पर और एनएसई (NSE) में निफ्टी 8,601.50 के स्तर पर खुला। सेंसेक्स ने आज 28518.06 और निफ्टी ने 8,646.75 के ऊपरी स्तरों को छुआ तो वहीं सेंसेक्स ने 28138.30 और निफ्टी ने 8518 के निचले स्तरों को छुआ। सत्र के अंत में सेंसेक्स -238 अंक या 0.84% की गिरावट के साथ 28,182 पर बंद हुआ। निफ्टी -74 अंक या -0.86% की गिरावट के साथ 8,529.45 के स्तर बंद हुआ। छोटे-मँझोले शेयरों में गिरावट का ही रुख देखने को मिला। बीएसई मिडकैप में -1.42% की बढ़त दर्ज हुई और बीएसई स्मॉलकैप भी -1.59% गिरावट रही । इसी तरह एनएसई के सीएनएक्स मिडकैप में भी -1.69% की और सीएनएक्स स्मॉलकैप -1.85% की गिरावट दर्ज हुई।
क्षेत्रवार देखें तो बीएसई में आईटी (4.57%), टीईसीके (3.82%) को छोड़कर सभी क्षेत्र गिरावट के साथ बंद हुए। हेल्थकेयर (-5.93%), रियल्टी (-2.16%), तेल-गैस (-1.74%), एफएमसीजी (-1.67%), बैकिंग (-1.66%), पावर (-1.49%), कंज्यूमर ड्यूरेबल (-1.27%), कैपिटल गुड्स (-1.20%), मेटल (-1.18%), ऑटो (-0.36%) गिर कर बंद हुए।
(शेयर मंथन, 21 जुलाई 2015)

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख