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तीसरी तिमाही के नतीजों के बाद एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, सीबीआई, फेडरल बैंक शेयरों का विश्लेषण

बैंकिंग सेक्टर में तिमाही नतीजों का सीजन शुरू होते ही बाजार में हलचल तेज हो गई है। अब तक जो नतीजे सामने आए हैं, खासकर छोटे और मझोले स्तर के बैंकों के, उन पर बाजार की प्रतिक्रिया काफी हद तक सकारात्मक रही है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि इससे यह संकेत मिलता है कि बैंकिंग सेक्टर की सेहत फिलहाल मजबूत बनी हुई है और आने वाले हफ्ते में भी इसमें पॉजिटिव मूवमेंट की उम्मीद की जा सकती है। कुल मिलाकर बैंकिंग सेक्टर के नतीजे उम्मीद के मुताबिक या उससे बेहतर ही नजर आ रहे हैं। पहले से यह अनुमान था कि मौजूदा और आने वाले क्वार्टर्स में बैंकिंग सेक्टर का प्रदर्शन सुधरा रहेगा, और अब वही तस्वीर नतीजों में भी झलक रही है। आगे के क्वार्टर में भी ग्रोथ और बेहतर होने की संभावना है। हालांकि, एक जोखिम ऐसा है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, और वह है एनपीए का ट्रेंड। लंबे समय से एनपीए में गिरावट देखी जा रही थी, लेकिन अब क्रेडिट एक्सपेंशन के साथ इसमें हल्का सा उछाल आ सकता है। यह स्वाभाविक और स्वीकार्य माना जा रहा है। 

जब क्रेडिट ग्रोथ तेज होती है, तो प्रोविजनिंग भी बढ़ती है और एनपीए में मामूली इजाफा देखने को मिलता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि सिस्टम का ओवरऑल एनपीए लेवल अभी भी कंट्रोल में है। अगर एनपीए में बढ़ोतरी बेहद सीमित और माइल्ड रहती है, तो उससे पूरे बैंकिंग सिस्टम पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। बल्कि, मजबूत क्रेडिट ग्रोथ के फायदे इस हल्की नेगेटिविटी से कहीं ज्यादा होंगे।

आने वाले दिनों में बड़े बैंकों के नतीजे भी सामने आने वाले हैं, जिनमें HDFC बैंक, ICICI बैंक और Yes बैंक जैसे नाम शामिल हैं। HDFC बैंक को सेक्टर का “सरदार” माना जाता है और इसके नतीजों पर खास नजर रहेगी। इतने बड़े और कंजर्वेटिव बैंक के लिए इंडस्ट्री के आसपास की ग्रोथ भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। माइक्रोफाइनेंस जैसे हाई-रिस्क सेगमेंट में इसका एक्सपोजर सीमित है, जो इसे लंबी अवधि के लिए और भरोसेमंद बनाता है।

HDFC बैंक पर नजरिया

HDFC बैंक के चार्ट की बात करें तो हालिया गिरावट के बाद यह अब अच्छे लेवल पर नजर आ रहा है। करीब 900 के आसपास बना गैप फिलहाल मजबूत सपोर्ट जैसा दिखता है, जबकि ऊपर की तरफ 965 के आसपास का गैप रेजिस्टेंस की तरह काम कर रहा है। यानी फिलहाल यह शेयर एक रेंज में फंसा हुआ है। यह गिरावट एक हेल्दी करेक्शन मानी जा सकती है और धैर्य रखने वाले निवेशकों के लिए धीरे-धीरे एक्यूम्युलेशन का मौका देती है। लंबी अवधि में 1000 के ऊपर का रन बनना संभव माना जा रहा है, भले ही वह तुरंत न आए।

ICICI बैंक पर नजरिया

ICICI बैंक के संदर्भ में तस्वीर और भी स्पष्ट है। बैंकों के लिए सबसे बड़ा फैक्टर क्रेडिट ग्रोथ है और यहां सरकार व रेगुलेटर दोनों का फोकस साफ है कि अर्थव्यवस्था में लिक्विडिटी और क्रेडिट फ्लो बना रहे। नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ करीब 12% के लक्ष्य के साथ क्रेडिट ग्रोथ 12-15% के दायरे में रहनी चाहिए। इससे ज्यादा तेज ग्रोथ महंगाई का जोखिम बढ़ा सकती है। ICICI बैंक से उम्मीद यही है कि वह इंडस्ट्री के आसपास की ग्रोथ बनाए रखे और एनपीए में बढ़ोतरी 5 बेसिस पॉइंट से कम तक सीमित रहे।

फेडरल बैंक का शेयर विश्लेषण

छोटे और मझोले बैंकों में Federal Bank के नतीजों ने खास ध्यान खींचा है। नतीजे मजबूत रहे और शेयर में करीब 9% की तेजी भी देखने को मिली। हालांकि, यहां एक अहम बात यह है कि Federal Bank के वैल्यूएशंस पहले से ही काफी महंगे हो चुके हैं। ज्यादातर पॉजिटिव फैक्टर्स शेयर की कीमत में पहले ही शामिल हैं। ऐसे में, भले ही नतीजे अच्छे हों, निवेश के लिहाज से वैल्यूएशन एक रुकावट बन सकता है। अच्छे रिजल्ट के बाद भी हर शेयर में आगे तेज बढ़त हो, यह जरूरी नहीं।

वहीं, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के नतीजों में मुनाफे में 32% की बढ़ोतरी जरूर आकर्षक लगती है, लेकिन बाजार का भरोसा अभी भी सीमित दिख रहा है। एनपीए पहले काफी ऊंचे रहे हैं, भले ही अब प्रोविजनिंग बढ़ने से स्थिति में सुधार दिख रहा हो। नतीजों के बाद शेयर में शुरुआती उछाल जरूर आया, लेकिन वह टिक नहीं पाया और बिकवाली हावी हो गई। इससे साफ है कि निवेशक अभी इस बैंक को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं।


(शेयर मंथन, 19 जनवरी 2026)

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