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क्या यह शेयर बाजार में गिरावट मौका है या खतरे की घंटी, निवेशकों को क्या करना चाहिए?

बजट भाषण के दौरान एसटीटी से जुड़ी घोषणा आते ही बाजार में जबरदस्त अफरातफरी देखने को मिली। बजट से पहले बाजार में बहुत ज्यादा पॉजिटिव उम्मीदें नहीं थीं, लेकिन इतनी नकारात्मक प्रतिक्रिया की भी तैयारी नहीं थी। 

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि बजट से पहले बाजार में बहुत ज्यादा पॉजिटिव उम्मीदें नहीं थीं, लेकिन इतनी नकारात्मक प्रतिक्रिया की भी तैयारी नहीं थी। खासकर ऐसे समय में जब पहले से ही एफआईआई का आउटफ्लो चल रहा है और सेंटिमेंट कमजोर बना हुआ है, तब एसटीटी बढ़ाने जैसे फैसले ने बाजार के घाव पर नमक छिड़कने जैसा काम किया। एसटीटी बढ़ाने का इरादा भले ही गलत न हो, क्योंकि सरकार सट्टेबाज़ी को हतोत्साहित करना चाहती है, लेकिन इसकी टाइमिंग बेहद खराब रही है। जब बाजार पहले से दबाव में हो और विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हों, उस वक्त ऐसा कदम उठाना कैपिटल मार्केट के सेंटिमेंट को और कमजोर करता है। अमेरिका जैसे देशों में मजबूत अर्थव्यवस्था के साथ मजबूत कैपिटल मार्केट को भी सरकार की ताकत माना जाता है, जबकि भारत में ऐसा लगता है कि कैपिटल मार्केट को उतनी अहमियत नहीं दी जा रही। 

इस फैसले का सबसे ज्यादा असर ट्रेडर्स पर पड़ेगा, खासकर एफएंडओ सेगमेंट में एक्टिव रहने वालों पर। एसटीटी बढ़ने से ट्रेडिंग कॉस्ट काफी बढ़ जाएगी, जिससे ऑप्शन राइटर्स और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स का ब्रेक-ईवन पॉइंट ऊपर खिसक जाएगा। पहले जहां कम लागत में स्ट्रैडल-स्ट्रैंगल जैसी रणनीतियों से प्रीमियम कमाने की गुंजाइश रहती थी, अब बढ़ी हुई टैक्स कॉस्ट के चलते मुनाफा निकालना मुश्किल हो जाएगा। छोटे रिटेल ट्रेडर्स के लिए यह झटका ज्यादा दर्दनाक साबित हो सकता है, क्योंकि वे पहले ही नुकसान झेल रहे हैं।

हालांकि निवेशकों के नजरिए से यह कदम सीधे तौर पर नेगेटिव नहीं है, लेकिन शॉर्ट टर्म में इसका असर उनके पोर्टफोलियो पर जरूर दिखेगा। बाजार में आई तेज़ गिरावट के चलते लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स भी कुछ समय के लिए नुकसान में रह सकते हैं। बावजूद इसके, मजबूत जीडीपी ग्रोथ और इकोनॉमिक फंडामेंटल्स के चलते लंबे समय में बाजार इस झटके को पचा सकता है। इतिहास गवाह है कि बजट के दिन बना लो अक्सर एक अहम सपोर्ट लेवल बन जाता है और अगर वह स्तर बचा रहता है तो बाजार धीरे-धीरे संभल भी जाता है।

सरकार का मकसद सट्टेबाजी पर लगाम लगाना और “ईज़ी मनी” की आदत को तोड़ना हो सकता है, जो कोविड के बाद कई निवेशकों और ट्रेडर्स में बढ़ गई थी। बड़ी संख्या में लोग नौकरी छोड़कर ट्रेडिंग को फुल-टाइम पेशा बना रहे हैं, बिना जोखिम समझे भारी नुकसान उठा रहे हैं। ऐसे में स्पेकुलेशन को हतोत्साहित करना सही दिशा में कदम माना जा सकता है। इससे निवेश को लेकर लोगों में अनुशासन आएगा और अव्यावहारिक रिटर्न की उम्मीदें कम होंगी।


(शेयर मंथन, 02 फरवरी 2026)

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