शेयर मंथन में खोजें

एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स

छोटी हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के शेयर में परेशानी के दौरान निवेशकों को क्या करना चाहिए? पीयूष

पीयूष जानना चाहते हैं कि उन्हें छोटी हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

 बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि हाल के महीनों में स्मॉल हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs) के प्रदर्शन में कमजोरी साफ दिखाई दी है। इन कंपनियों पर जो दबाव दिख रहा है, वह अस्थायी जरूर है, लेकिन फिलहाल इनके लिए चुनौतीपूर्ण समय बना हुआ है। दरअसल, इन कंपनियों की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) यानी ऋण वसूली की स्थिति में गिरावट देखने को मिल रही है, जिससे उनके वैल्यूएशन (Valuation) पर नकारात्मक असर पड़ा है। यह स्थिति कोई अचानक नहीं आई है। कुछ समय पहले ही संकेत मिलने लगे थे कि हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर, खासकर छोटी कंपनियां, निकट भविष्य में कठिन दौर से गुजर सकती हैं। इसका मुख्य कारण था रियल एस्टेट सेक्टर की सुस्ती और बढ़ती ब्याज दरों का असर। जब निर्माण कार्यों में मंदी आती है या खरीदारों की मांग घटती है, तो हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों पर लोन की अदायगी का जोखिम बढ़ जाता है। यही कारण रहा कि इनकी बैलेंस शीट पर दबाव दिखने लगा।


(शेयर मंथन, 08 नंवबर 2025)

(आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख