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आने वाले 2-3 हफ्तों में कौन से सेक्टर शानदार प्रदर्शन करेंगे?

मौजूदा हालात में शेयर बाजार के सामने सबसे पहला और सबसे ठोस ट्रिगर तिमाही नतीजों का सीजन ही है। 

बाजार विश्लेषक विकास सेठी का कहना है कि वैश्विक स्तर पर ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और फिलहाल ऐसी कोई ठोस संकेत नहीं मिल रहे हैं कि तुरंत कोई बड़ा पॉजिटिव ऐलान होने वाला है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब पूरी तरह से कंपनियों के क्वार्टरली रिजल्ट्स पर टिक गई है, क्योंकि वही तय करेंगे कि बाजार की अगली दिशा क्या होगी। अब तक जो कंपनियों के मैनेजमेंट कमेंट्स, बिजनेस अपडेट्स और शुरुआती संकेत सामने आए हैं, उन्हें देखते हुए बैंकिंग और एनबीएफसी सेक्टर से अच्छे नतीजों की उम्मीद की जा रही है। पिछले कुछ हफ्तों में बैंकों की ओर से जो ऑपरेशनल अपडेट्स आए हैं, वे काफी संतोषजनक रहे हैं। क्रेडिट ग्रोथ, एसेट क्वालिटी और मार्जिन के मोर्चे पर स्थिति स्थिर नजर आ रही है, जिससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि बैंक और एनबीएफसी सेक्टर इस रिजल्ट सीजन में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। 

ऑटोमोबाइल सेक्टर भी इस बार फोकस में रहने वाला है। पिछले दो-तीन महीनों से ऑटो कंपनियों के मासिक बिक्री आंकड़े बेहतर आ रहे हैं। इसका असर पहले ही ऑटो और ऑटो कंपोनेंट शेयरों में तेजी के रूप में दिख चुका है। इन्हीं मजबूत बिक्री आंकड़ों के आधार पर यह उम्मीद की जा रही है कि ऑटो कंपनियों के तिमाही नतीजे भी सकारात्मक रह सकते हैं, जो इस सेक्टर में आगे और मजबूती ला सकते हैं। रुपये में हालिया कमजोरी यानी डिप्रिसिएशन से एक्सपोर्ट ओरिएंटेड सेक्टर्स को भी फायदा मिलने की संभावना है। खास तौर पर फार्मा सेक्टर को इससे सीधा लाभ मिल सकता है, क्योंकि उसकी आमदनी का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों से आता है। आईटी सेक्टर भी रुपये की कमजोरी से लाभान्वित होता है, हालांकि आईटी के लिए वैश्विक मांग को लेकर अभी भी कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। इसके बावजूद, फार्मा और चुनिंदा आईटी कंपनियों के नतीजों पर निवेशकों को खास नजर रखनी चाहिए।

इसके साथ ही बजट अब ज्यादा दूर नहीं है, और बजट से पहले कुछ सेक्टर्स में शॉर्ट टर्म मूवमेंट देखने को मिल सकता है। पीएसयू और डिफेंस सेक्टर ऐसे ही प्रमुख क्षेत्र हैं, जहां बजट और मौजूदा जियोपॉलिटिकल टेंशंस के चलते उम्मीदें बनी हुई हैं। डिफेंस खर्च में बढ़ोतरी की संभावना इस सेक्टर के लिए सकारात्मक मानी जा रही है। इसके अलावा रेलवे, अफोर्डेबल हाउसिंग, एग्रीकल्चर और रूरल इकॉनमी जैसे सेक्टर्स भी बजट के दौरान चर्चा में रहते हैं और इनमें अवसर बन सकते हैं।

आने वाले दो-तीन हफ्तों के शॉर्ट टर्म नजरिये से देखा जाए तो निवेशकों को सेक्टोरल अप्रोच अपनानी चाहिए। अच्छी क्वालिटी कंपनियों पर फोकस रखते हुए बैंकिंग, एनबीएफसी, ऑटो, फार्मा, डिफेंस और बजट से जुड़े सेक्टर्स को रडार पर रखना समझदारी होगी। इसी रणनीति के साथ तिमाही नतीजों और बजट से जुड़े घटनाक्रमों को ध्यान में रखकर निवेश के अवसर तलाशे जा सकते हैं।


(शेयर मंथन, 08 जनवरी 2026)

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