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क्या निफ्टी और बैंक निफ्टी में बड़ी गिरावट आने वाली है? जानें एक्सपर्ट की राय

इस हफ्ते की शुरुआत शेयर बाजार के लिए बेहद अहम रहने वाली है, क्योंकि एक साथ कई दिग्गज कंपनियों के नतीजे सामने आने वाले हैं।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि बाजार की दिशा काफी हद तक इन्हीं नतीजों और उनके मैनेजमेंट कमेंट्री पर निर्भर करेगी। निवेशकों के लिए यह समय केवल हेडलाइन नंबर देखने का नहीं, बल्कि एक स्पष्ट चेकलिस्ट के साथ रिजल्ट्स को परखने का है। आईटी सेक्टर की बात करें तो पिछले तीन-चार तिमाहियों से तस्वीर लगभग एक जैसी रही है। विज़िबिलिटी कमजोर है, बड़े सौदों की ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ी है, लेकिन इसके बावजूद टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल टेक जैसे दिग्गज कंपनियां किसी न किसी तरह से एक्सपेक्टेशन मैनेज कर लेती हैं। एचसीएल टेक का पिछला क्वार्टर अपेक्षाकृत बेहतर रहा था, इसलिए उससे इस बार भी ठीक-ठाक प्रदर्शन की उम्मीद है। कुल मिलाकर आईटी कंपनियों से बहुत बड़े सरप्राइज की उम्मीद नहीं है, लेकिन यह माना जा रहा है कि ओवरऑल नंबर्स पिछले क्वार्टर की तुलना में थोड़े बेहतर दिख सकते हैं। 

बैंकिंग सेक्टर में एचडीएफसी बैंक के बिजनेस अपडेट पहले ही आ चुके हैं, जिसमें उन्होंने इंडस्ट्री के अनुरूप ग्रोथ की बात कही है। इससे संकेत मिलता है कि बड़े स्तर पर कोई नकारात्मक सरप्राइज नहीं होना चाहिए। हालांकि बैंक निफ्टी में हाल के दिनों में मुनाफावसूली के संकेत जरूर दिखे हैं। इसके बावजूद ट्रेंड अब भी मजबूत माना जा रहा है। जब तक बैंक निफ्टी 59,000 के नीचे निर्णायक क्लोजिंग नहीं देता, तब तक बड़ी करेक्शन की बात करना जल्दबाजी होगी। 59,000 के नीचे जाने पर 50-डे मूविंग एवरेज और फ्लैट बेस दोनों टूटेंगे, जिसके बाद “वेट एंड वॉच” की रणनीति ज्यादा उपयुक्त होगी। 

फिलहाल यही है कि 25,500 का स्तर निफ्टी के लिए बेहद अहम है। जब तक इसके नीचे ठोस ब्रेकडाउन नहीं होता, तब तक यह मानना ठीक होगा कि बाजार अपने वर्स्ट फेज के काफी करीब है। अगर हालात इससे ज्यादा बिगड़ते हैं, तो गिरावट भी उसी अनुपात में तेज और गहरी होगी। इसलिए निवेशकों के लिए सबसे जरूरी है भावनाओं में बहने के बजाय आंकड़ों, ट्रेंड और वैल्यूएशन के आधार पर सोच-समझकर फैसले लेना।


(शेयर मंथन, 13 जनवरी 2026)

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