विप्रो का ताजा रिजल्ट कुल मिलाकर ठीक-ठाक कहा जा सकता है। बाजार में पहले से ही यह धारणा बनी हुई थी कि यह क्वार्टर बहुत मजबूत नहीं रहेगा, इसलिए एक्सपेक्टेशंस काफी म्यूटेड थीं।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि ऐसे में विप्रो का परफॉर्मेंस निराशाजनक नहीं रहा। मैनेजमेंट और बिज़नेस ट्रेंड्स से यह साफ संकेत मिला कि अगला क्वार्टर भी बहुत स्ट्रॉन्ग होने की बजाय एक “allocation quarter” जैसा रहेगा। यानी बड़े सरप्राइज़ की उम्मीद फिलहाल कम है, लेकिन स्थिरता बनी हुई है। टेक महिंद्राके नतीजे भी इसी लाइन में रहे। IT कंपनियों के रिजल्ट्स से पहले बाजार की उम्मीदें कमजोर थीं और उसी के मुकाबले देखा जाए तो इन कंपनियों ने ठीक-ठाक डिलीवरी दी है। यही वजह है कि शेयर प्राइस का रिस्पॉन्स भी बहुत नेगेटिव नहीं रहा। कुल मिलाकर IT सेक्टर का सेंटिमेंट हल्का सा पॉजिटिव बना हुआ है, भले ही ग्रोथ बहुत आक्रामक न दिख रही हो।
अगर विप्रो के चार्ट और लेवल्स की बात करें, तो 260 रुपये का स्तर काफी अहम माना जा रहा है। जब तक शेयर 260 के नीचे क्लोज नहीं करता, तब तक ट्रेंड को पॉजिटिव माना जा सकता है। विप्रो का इतिहास रहा है कि कभी दो-तीन क्वार्टर अच्छे निकलते हैं, फिर अचानक कमजोर परफॉर्मेंस आ जाती है। इसी वजह से निवेशकों का भरोसा पूरी तरह मजबूत नहीं हो पाता। हालांकि, अगर सिर्फ प्राइस एक्शन को देखा जाए और फंडामेंटल उतार-चढ़ाव को थोड़ी देर के लिए नजरअंदाज किया जाए, तो मौजूदा स्तरों से चीजें बेहतर होती दिख सकती हैं।
अंत में बात यही निकलती है कि IT सेक्टर में अभी साइकिल पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, बल्कि आगे की संभावनाएं बाकी हैं। सवाल सिर्फ इतना है कि कंपनियां इस मौके को कितना अच्छे से भुना पाती हैं। विप्रो के मामले में फिलहाल रणनीति सिंपल रखी जा सकती है, जब तक 260 का सपोर्ट बना हुआ है, तब तक ट्रेंड ठीक माना जाएगा, और अगर साइकिल ने रफ्तार पकड़ी तो ऊपर के लेवल्स भी देखने को मिल सकते हैं।
(शेयर मंथन, 22 जनवरी 2026)
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