शेयर मंथन में खोजें

एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स

गिरावट के बाद मजबूत शेयरों की रिकवरी में कितना समय लग सकता है?

हालिया बाजार परिस्थितियों में 23,700 से 24,000 के दायरे को एक महत्वपूर्ण रेंज के रूप में देखा जा रहा है, जहां निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में रणनीतिक बदलाव करने की जरूरत हो सकती है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि बाजार में आई गिरावट ने केवल कमजोर शेयरों को ही नहीं, बल्कि मजबूत कंपनियों को भी प्रभावित किया है, जिनकी रिकवरी में अब थोड़ा अधिक समय लग सकता है। इसका मुख्य कारण ऊर्जा संसाधनों, जैसे गैस और तेल की उपलब्धता और कीमतों से जुड़ी अनिश्चितता है, जिसका सीधा असर MSME सेक्टर और समग्र क्रेडिट ग्रोथ पर पड़ सकता है। ऐसे में निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी मौजूदा पोजीशंस में से लगभग 10-15% कैश रिलीज करें, खासकर उन सेक्टर्स से जो इस नए प्रकार की गिरावट से अधिक प्रभावित हुए हैं।

विशेष रूप से वे व्यवसाय जिनके लिए वर्तमान परिस्थितियां कोविड जैसी चुनौतीपूर्ण बन गई हैं। जैसे टाइल्स, सिरेमिक, पेंट्स, रेस्टोरेंट्स और फूड इंडस्ट्री इन पर दबाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि इनकी लागत संरचना में एलपीजी और तेल जैसे इनपुट्स की बड़ी भूमिका होती है। हालांकि इन कंपनियों के समाप्त होने का खतरा नहीं है, लेकिन उनकी रिकवरी 6 से 12 महीनों तक टल सकती है। इसलिए ऐसे सेक्टर्स में वेटेज कम करके पोर्टफोलियो को री-स्ट्रक्चर करना समझदारी भरा कदम हो सकता है।

दूसरी ओर, फार्मा सेक्टर में विशेष रूप से उन कंपनियों में निवेश बढ़ाने की सलाह दी जा रही है जिनका फोकस घरेलू बाजार पर अधिक है। यह सेक्टर अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जा रहा है और मौजूदा अनिश्चितताओं के बीच स्थिर प्रदर्शन दे सकता है। BFSI सेक्टर के संदर्भ में, फिलहाल वेटेज बढ़ाने के बजाय मौजूदा स्तर को बनाए रखना बेहतर रहेगा, क्योंकि महंगाई और अन्य आर्थिक संकेतकों का प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है। वहीं, कंजंप्शन सेक्टर में निवेश बनाए रखना चाहिए, और यदि गिरावट के कारण वेटेज कम हो गया है तो उसे मौजूदा बाजार मूल्य के अनुसार पुनः संतुलित किया जा सकता है।

तकनीकी दृष्टिकोण से, 24,000 के ऊपर क्लोजिंग आने पर बाजार में शॉर्ट कवरिंग के चलते तेजी देखने को मिल सकती है। लेकिन नीचे की ओर जोखिम अभी भी बना हुआ है और कोई निश्चित सपोर्ट स्तर स्पष्ट नहीं है। बाजार की दिशा काफी हद तक 15 से 20 अप्रैल के बीच होने वाले वैश्विक और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। खासकर कच्चे तेल की कीमतें (ब्रेंट क्रूड $90 प्रति बैरल से नीचे आती हैं या नहीं) और ईरान द्वारा हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर लिए गए फैसले बाजार की चाल तय करेंगे। इन दो प्रमुख संकेतकों पर नजर बनाए रखना निवेशकों के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि यही आने वाले समय की दिशा निर्धारित कर सकते हैं।

 



(शेयर मंथन, 09 अप्रैल 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

देश मंथन के आलेख