शेयर मंथन में खोजें

एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स

भारतीय वायुसेना की कार्यवाई से शेयर बाजार में भूचाल, 10,800 के नीचे निफ्टी

मंगलवार को शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिल रही है।

दोनों प्रमुख सूचकांकों में करीब 1-1% की कमजोरी है, जबकि छोटे-मँझोले सूचकांकों में 1.70% तक की गिरावट है। डॉलर के मुकाबले रुपया भी 28 पैसे की कमजोरी के साथ 71.26 पर खुला।
गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के अंदर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग ठिकानों को निशाना बनाया है। इस हमले से सीमा पर तनाव की स्थिति है, जिसका बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा है। हाल ही में पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद कार्रवाई करते हुए वायुसेना ने पाकिस्तान की जमीन पर आतंकी ठिकानों पर हमले किये। पुलवामा आतंकी हमले में 40 से ज्यादा भारतीय जवान शहीद हुए थे।
बीएसई सेंसेक्स (Sensex) 36,213.38 के पिछले बंद स्तर की तुलना में 35,975.75 पर खुल कर पौने 10 बजे के करीब 352.35 अंक या 0.97% की कमजोरी के साथ 35,861.03 पर है। वहीं एनएसई का निफ्टी (Nifty) 10,880.10 के पिछले बंद स्तर के मुकाबले 10,775.30 पर खुल कर 101.65 अंक या 0.93% की गिरावट के साथ 10,778.45 पर है।
प्रमुख सूचकांकों में बढ़ोतरी के साथ ही छोटे-मॅंझोले बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिल रही है। बीएसई मिडकैप में 1.40% और बीएसई स्मॉलकैप में 1.32% की गिरावट है। वहीं निफ्टी मिड 100 में 1.68% और निफ्टी स्मॉल 100 में 1.70% की कमजोरी है।
इस समय निफ्टी के प्रमुख 50 में से 07 शेयर और सेंसेक्स के प्रमुख 31 शेयरों में से 04 शेयर मजबूत स्थिति में हैं। (शेयर मंथन, 26 फरवरी 2019)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख