शेयर मंथन में खोजें

एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स

विदेशी खाताधारकों में प्रदीप बर्मन (Pradip Burman) के नाम से लुढ़का डाबर (Dabur)

केंद्र सरकार ने आज सर्वोच्च न्यायालय में काले धन के मामले में चल रही सुनवाई में विदेशी बैंकों में खाता रखने वाले तीन भारतीयों के नाम सामने रखे, जिनमें से एक नाम डाबर इंडिया (Dabur India) के प्रमोटर परिवार के प्रदीप बर्मन का है।

सरकार ने आज न्यायालय में जो हलफनामा दाखिल किया, उसमें बर्मन के अलावा पंकज चिमनलाल लोधिया और राधा एस. टिम्ब्लू के नाम शामिल हैं। टिम्बलू का नाम इससे पहले गोवा में अवैध खनन के मामले में भी सामने आया था।

इस बीच डाबर इंडिया ने एक बयान जारी कर कहा कि प्रदीप बर्मन का विदेशी बैंक में खाता उस समय खोला गया था, जब वे एक अनिवासी भारतीय (NRI) थे और यह खाता खोलने के लिए कानूनी तौर पर अधिकृत थे। डाबर ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि "हमने सभी कानूनों का पालन किया है और इस खाते से संबंधित सारे विवरण स्वैच्छिक रूप से और कानून के मुताबिक आयकर विभाग को सौंपे गये एवं जहाँ भी लागू हो वहाँ उपयुक्त करों का भुगतान किया गया। इसलिए यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक विदेशी बैंक खाता रखने वाले सभी व्यक्तियों को एक ही रंग से रंगा जा रहा है।"

प्रदीप बर्मन का नाम सामने आने के तुरंत बाद डाबर इंडिया के शेयर भाव में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। यह 215.80 रुपये के पिछले बंद भाव से टूट कर 196.40 रुपये तक गिर गया, जहाँ यह लगभग 9% नीचे था। हालाँकि कुछ समय बाद यह थोड़ा सँभल गया, लेकिन करीब पौने एक बजे भी यह 3.5% के नुकसान पर चल रहा है। (शेयर मंथन, 27 अक्टूबर 2014) 

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख