शेयर मंथन में खोजें

एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स

आरबीआई (RBI) ने खारिज की लक्ष्मी विलास बैंक-इंडियाबुल्स हाउसिंग विलय योजना

आरबीआई (RBI) ने लक्ष्मी विलास बैंक (Lakshmi Vilas Bank) के इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस (Indiabulls Housing Finance) के साथ विलय योजना को खारिज कर दिया है।

आरबीआई के मुताबिक लक्ष्मी विलास बैंक के इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस और इंडियाबुल्स कमर्शियल क्रेडिट के साथ विलय को मंजूरी नहीं दी जा सकती।
दरअसल आरबीआई ने 27 सितंबर को लक्ष्मी विलास बैंक के खिलाफ उच्च गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए), अपर्याप्त पूँजी पर्याप्तता स्तरों, परिसंपत्तियों पर नकारात्मक रिटर्न और उच्च लेवरेज के चलते शीघ्र सुधारक कार्रवाई (पीसीए) शुरू की थी।
लक्ष्मी विलास बैंक ने इस विलय योजना के लिए मई में आवेदन किया था, जबकि जून में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India) या सीसीआई ने विलय को मंजूरी दे दी थी। इस साल अप्रैल में लक्ष्मी विलास बैंक ने विस्तृत पूँजी आधार और व्यापक भौगोलिक पहुँच के साथ एक संयुक्त इकाई बनाने के इरादे से इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस के साथ अपने विलय की घोषणा की थी।
आरबीआई के फैसले से इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस का शेयर दबाव में है। बीएसई में इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस का शेयर 240.30 रुपये के पिछले बंद स्तर के मुकाबले आज गिरावट के साथ 228.05 रुपये पर खुल कर 208.20 रुपये के निचले भाव तक टूट गया, जो इसके पिछले 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर है।
सवा 10 बजे के करीब यह 11.22% की कमजोरी के साथ 213.35 रुपये पर है। इस भाव पर कंपनी की बाजार पूँजी 9,092.36 करोड़ रुपये। (शेयर मंथन, 10 अक्टूबर 2019)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख