शेयर मंथन में खोजें

एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स

नेस्ले का चौथी तिमाही में मुनाफा 27% बढ़ा, डॉ रेड्डीज के साथ JV करार का ऐलान

एफएमसीजी की दिग्गज कंपनी नेस्ले ने चौथी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी के मुनाफे में 27% की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी का कंसोलिडेटेड मुनाफा 737 करोड़ रुपये से बढ़कर 934 करोड़ रुपये हो गया है। कंपनी की आय में 9.1% की बढ़ोतरी हुई है।

 ऐसा पहली बार हुआ है जब नेस्ले की घरेलू बिक्री 5000 करोड़ रुपये के पार चला गया है। वहीं आय 4831 करोड़ रुपये से बढ़कर 5268 करोड़ रुपये हो गई है। कंपनी के कामकाजी मुनाफे में 21.8% की वृद्धि दर्ज हुई है। कंपनी का कामकाजी मुनाफा 1107 करोड़ रुपये से बढ़कर 1350 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। वहीं मार्जिन 22.9% से बढ़कर 25.6% के स्तर पर पहुंच गई है। कंपनी ने 8.5 रुपये प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड का ऐलान किया है। कंपनी का जनवरी-मार्च में निर्यात 196 करोड़ रुपये से बढ़कर 233 करोड़ रुपये हो गया है। कॉफी और कोकोआ की बढ़ती कीमतें कंपनी की वृद्धि के लिए चुनौती बनी हुई है। ज्यादा गर्मी पड़ने से दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का अनुमान है। कंपनी को संभावना है कि कमोडिटी की ऊंची कीमतों से मार्जिन पर असर पड़ सकता है।

वहीं कंपनी ने डॉ रेड्डीज के साथ करार का ऐलान किया है। डॉ रेड्डीज के साथ संयुक्त उपक्रम के गठन का ऐलान किया है। इस करार के तहत नेस्ले डॉ रेड्डीज के न्यूट्रास्यूटिकल्स डिवीजन में निवेश करेगी। इस संयुक्त उपक्रम में नेस्ले इंडिया की हिस्सेदारी 49% की होगी। इसके साथ ही कॉल ऑप्शन के जरिए 6 साल के बाद फेयर मार्केट वैल्यू के आधार पर हिस्सेदारी बढ़ा सकती है। नेस्ले के हिस्सा बिक्री के बावजूद डॉ रेड्डीज की हिस्सेदारी 40% से कम नहीं होगी।

(शेयर मंथन, 26 अप्रैल 2023)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख