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कपास में तेजी और चने में गिरावट की संभावना - एसएमसी

कपास वायदा (दिसंबर) की कीमतों में तेजी जारी रह सकती है और कीमतें 980 रुपये के स्तर पर पहुँच सकती हैं।

निर्यातकों की ओर से नयी माँग के कारण मध्य और दक्षिण भारत में कपास की हाजिर कीमतों में तेजी दर्ज की गयी। बांग्लादेश, वियतनाम और थाइलैंड महाराष्ट्र के मध्य वेराइटी के कपास की खरीदारी कर रहे हैं। महाराष्ट्र में गुलाबी कीटों के प्रकोप से कपास की फसल प्रभावित हुई है। गुलाबी कीट कपास के रेशों को ही खा जाते हैं, जिससे फसल को काफी नुकसान होता है। चना वायदा (दिसंबर) की कीमतों में 4,400-4,350 रुपये तक गिरावट होने की संभावना है। बुआई के आँकड़ों से पता चलता है कि रबि सीजन के दौरान चने की सप्लाई बेहतर रह सकती है, क्योंकि मिट्टी में कम नमी को देखते हुए किसान गेहूँ के बजाय चने की अधिक खेती कर रहे हैं। सरकार ने चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 10% बढ़ाये जाने और हाल ही में मटर पर आयाम शुल्क बढ़ा कर 50% करने का फैसला किया है। इसके परिणाम स्वरुप मौजूदा सीजन में चने का उत्पादन क्षेत्र 16% बढ़ कर 7.3 मिलियन हेक्टेयर हो जाने का अनुमान है, जिसके कारण उत्पादन भी 35-40% बढ़ कर 9.9 मिलियन टन हो जाने का अनुमान है। ग्वारसीड वायदा (दिसंबर) की कीमतों के 3,785-3,930 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है। कम होती आपूर्ति के बीच मिलों की ओर से अच्छी खरीदारी के कारण हाजिर बाजारों में ग्वारसीड और ग्वारगम की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। जोधपुर बाजार में ग्वारसीड की कीमतें 75 रुपये बढ़कर 3,900 रुपये प्रति 100 किलो ग्राम हो गयी है, जबकि ग्वारगम की कीमतें 175 रुपये बढ़कर 8,850 रुपये किलो ग्राम हो गयी हैं। स्टॉकिस्टों की ओर से माँग अभी भी कमजोर है। (शेयर मंथन, 05 दिसंबर 2017)

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