शेयर मंथन में खोजें

हल्दी में हो सकती है गिरावट, जीरे में नरमी का रुझान - एसएमसी

हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतों में 6,650-6,600 रुपये तक गिरावट हो सकती है।

कमजोर घरेलू माँग के बीच नयी फसल की थोड़ी-थोड़ी आवक के कारण बाजार में हल्दी की पर्याप्त उपलब्धता के कारण कीमतों में नरमी का रुझान है। कल इरोद को ऑपरेटिव सोसाइटी में केवल एक बैग हल्दी की बिक्री हुई है। 10 से अधिक कारोबारियों ने फिंगर वेराइटी के लिए न्यूनतम 5,299 रुपये प्रति क्विंटल और अधिकतम 6,900 रुपये प्रति क्विंटल बोली लगायी जबकि रूट वेराइटी की कीमतें 4,599-7,019 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में हैं। यह अब तक सबसे कम बिक्री है। जीरा वायदा (मार्च) की कीमतें को नरमी के रुझान के साथ 14,700-15,120 रुपये दायरे में साइडवेज कारोबार करने की संभावना है। कारोबारियों की ओर से कमजोर माँग के कारण उंझा और राजकोट बाजारों में जीरे की कीमतों में 50-100 रुपये प्रति 20 किलो की गिरावट हुई है। इस वर्ष जीरे का उत्पादन पिछले वर्ष के 59.32 लाख बैग की तुलना में 69.23 लाख बैग होने का अनुमान है। धनिया वायदा (अप्रैल) की कीमतों को 5,400 रुपये के नजदीक सपोर्ट मिल सकता है और कीमतों की गिरावट पर रोक लग सकती हैं। घरेलू बाजारों में फिलहाल आपूर्ति की दबाव कम है। क्योंकि नयी फसल की आवक की रफ्तार काफी धीमी है। और आवक में तेजी मार्च के बाद ही शुरु होगी और अप्रैल के अंत तक चलेगी। फिर भी इस वर्ष कम उत्पादन अनुमान के कारण अधिक आवक के दिनों में भी कारोबारियों को कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद है। इस वर्ष धनिया का उत्पादन 80 लाख बैग होने का अनुमान है लेकिन धनिया की उत्पादकता पिछले वर्ष के लगभग बराबर रहने की संभावना है। इस वर्ष धनिया के निर्यात में बढ़ोतरी होने की संभावना है। क्योंकि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए धनिया की कीमतें काफी आकर्षक हो गयी है। (शेयर मंथन, 27 फरवरी 2018)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख