शेयर मंथन में खोजें

हल्दी और धनिया के लिए बाधा - एसएमसी

सामित दायरे में कारोबार के साथ हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतों को 6,900 के नजदीक बाधा का सामना करना पड़ सकता है।
देश के प्रमुख हाजिर बाजारों में हल्दी की कीमतों में नरमी का रुझान है लेकिन बसमत नगर में माँग और आपूर्ति के बराबर होने के कारण कीमतों में स्थिरता है। अच्छी आवक के बीच कमजोर माँग के कारण निजामाबाद, सांगली और इरोद में हल्दी की कीमतों में 100-200 रुपये किलो ग्राम की गिरावट हुई है। जीरा वायदा (अप्रैल) की कीमतें 14,400-15,000 रुपये के दायरे में साइडवेज कारोबार कर सकती हैं। आवक में बढ़ोतरी के कारण ऊंझा में जीरे की हाजिर कीमतों में 25 रुपये प्रति 20 किलो ग्राम की गिरावट हुई है, जबकि गोंदल और राजकोट में जीरे की कीमतों में स्थिरता है। सुस्त घरेलू और निर्यात माँग एवं बढ़ती आवक के कारण कारोबारी खरीदारी को लेकर रूचि नही दिखा रहे हैं। धनिया वायदा (अप्रैल) में जवाबी खरीद (शॉर्ट कवरिंग) को 5,400 रुपये के स्तर पर रेजिस्टेंस (बाधा) का सामना करना पड़ सकता है। कोटा और बरान बाजारों में धनिया की हाजिर कीमतों में 100-300 रुपये प्रति 100 किलो ग्राम की गिरावट हुई है, जबकि रामगंज और राजकोट में कीमतों में स्थिरता है। वर्तमान समय में घरेलू और निर्यात करने वाले खरीदारो की ओर से बहुत अधिक माँग नही हो रही है, क्योंकि वे मार्च-अप्रैल में अधिकतम आवक के दौरान कीमतों में गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं। नयी फसल के साथ ही पुराने स्टॉक के बाजार में धनिया की उपलब्ध्ता भी अधिक हैं। (शेयर मंथन, 14 मार्च 2018)
 

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख