शेयर मंथन में खोजें

चने में नरमी का रुझान का बरकरार, कॉटन सीड ऑयल केक में हो सकती है वापसी - एसएमसी

चना वायदा (जून) कीमतों में अभी भी नरमी का रुझान है।
इस बीच चने की कीमतें 3,540-3,600 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती हैं। चना दाल की माँग काफी कम है इसलिए मिलें बड़ी खरीदारी से दूरी बनायी हुई हैं और मौजूदा सीजन में अधिक उत्पादन के बीच नयी फसल की आपूर्ति भी अधिक हो रही है। यद्यपि पिछले हफ्ते कीमतों में थोड़ी रिकवरी हुई है, लेकिन बाजारों में उत्साहजनक कारोबार नही हो रहा है और अधिकांश खरीदार कीमतों में स्थिरता आने का इंतजार कर रहे हैं।
कॉटन वायदा (मई) की कीमतों के 20,600-20,900 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना के साथ ही इनमें गिरावट पर रोक लगी रह सकती है। कपास की बुआई अभी शुरु होनी शेष है और खबरें है कि इस सीजन में उत्पादन क्षेत्र में कमी हो सकती है। दूसरी ओर माँग लगातार हो रही है जबकि आवक कम हो रही है क्योंकि मौजूदा वर्ष की लगभग 95% फसल की आवक बाजार में हो चुकी है। कारोबारियों की पैनी नजर अंतरराष्ट्रीय बाजार आईसीई में कपास के कारोबार पर बनी हुई है, जहाँ अमेरिका के प्रमुख कपास उत्पादक राज्य टेक्सास में सूखे मौसम के कारण 83 सेंट के सहारा के साथ कीमतों को मदद मिल रही है।
कॉटन सीड ऑयल केक वायदा (जून) की कीमतें 1,230 रुपये के स्तर पर सहारे के साथ 1,315-1,350 रुपये तक वापसी कर सकती है। जुलाई-अगस्त में, हरी घासों की उपलब्धता कम हो जाती है, पशु आहार की माँग में बढ़ोतरी की उम्मीद को ध्यान में रखते हुए, कारोबारी निचले स्तर पर कॉटन सीड ऑयल केक की खरीदारी कर रहे हैं। इसके साथ ही अगले दो-तीन महीनों में कॉटन सीड के भंडार में भी कमी आने की संभावना है, जिससे कॉटन सीड ऑयल केक की आपूर्ति कम हो सकती है। (शेयर मंथन, 07 मई 2018)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख